आज से शहर में मंगल ही मंगल है। दो दिन आखातीज का अबूझ मुहूर्त होने से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों युवाओं के घर बस रहे हैं। विवाह समारोह वाले घरों में सुबह से बैंडबाजे बजने लगे हैं। दो दिन के लिए शहर के मैरिज गार्डन, धर्मशालाएं, सामुदायिक भवन सभी बुक हैं। अक्षय तृतीया को चार प्रमुख अक्षय मुहूर्त में स्थान प्राप्त है। इस दिन किए गए शुभकार्य का कभी क्षय नहीं होता, ऐसी मान्यता है।

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किसानों ने अगली फसल के लिए किया भूमिपूजन

हिंदू धर्म शास्त्र और भारतीय काल गणना में अक्षय तृतीया को सबसे शुभ दिन माना जाता है। आज और कल यह पर्व पूरे उल्लास व परंपरा के साथ मनाया जाएगा। हजारों लग्न तो लगेंगे, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अगली फसल के लिए अपने खेतों में पारंपरिक रूप से भूमिपूजन कर रहे हैं। इस पर्व की महत्ता को देखते हुए पूरे अंचल में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

विभिन्न स्थानों पर सामूहिक विवाह के आयोजन हुए

जिला राजपूत समाज द्वारा 73 जोड़ों का निःशुल्क सामूहिक विवाह आज कांकरिया बोड़िया हातोद में हुआ। संस्था हर्ष द्वारा 25 जोड़ों का निःशुल्क सर्वसमाज सामूहिक विवाह बाणगंगा स्थित बाणेश्वर कुंड में, वहीं संस्था आनंद द्वारा सर्व समाज के 11 जोड़ों का निःशुल्क सामूहिक विवाह अरबिंदो हॉस्पिटल टोल नाका के पास मिष्टी पैलेस गार्डन में कराया गया। इसके अलावा विभिन्न संगठनों द्वारा भी वैवाहिक समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।

बाजारों में सुबह से ही रही रौनक 

आज सुबह से ही बाजारों में रौनक रही। मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर जो खरीदी की जाती है, वह अक्षय रहती है। सोना और चांदी हमारी लोकप्रिय परंपरा, जो समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है, इसे बड़ी संख्या में खरीदा जाता है, वहीं भगवान विष्णु को प्रिय जौ, माता लक्ष्मी को प्रिय पीली कौड़ी, मिट्टी के बर्तन घड़े, सेंधा नमक, प्रापर्टी, नए वस्त्र और वाहन भी शहर में बड़ी संख्या में खरीदे गए।

बड़ा गणपति यात्रा में 50 से अधिक स्वागत मंच सजे

अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर आज शहर आस्था, अनुशासन और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। एक ओर जहां परंपरागत शोभायात्रा बड़ा गणपति चौराहे से शाम 6 बजे प्रारंभ होकर राजवाड़ा तक पहुंची, वहीं दूसरी ओर बापट चौराहा स्थित भगवान परशुराम मंदिर से सायं 6:30 बजे भव्य सनातन शोभायात्रा निकली। दोनों आयोजनों को लेकर पूरे शहर में उत्साह और श्रद्धा का माहौल था।

सूरज जोशी, कन्नू मिश्रा, योगेश मिश्रा और विकास अवस्थी ने बताया कि करीब 2000 ब्राह्मण परिवारों के सहयोग से आयोजित बड़ा गणपति यात्रा में 50 से अधिक स्वागत मंच सजे। भगवान परशुराम की अष्टधातु प्रतिमा रथ पर विराजित रही, जिसका मार्गभर पूजन हुआ। विद्याधाम के बटुक मंत्रोच्चार करते हुए रथ के आगे चले, वहीं दो बैंड, तीन भजन मंडलियां और पांच आकर्षक झांकियों ने यात्रा की शोभा बढ़ाई। परंपरागत शोभायात्रा में जहां 40 सदस्यीय युवा टीम ने व्यवस्थाएं संभाली, वहीं करीब 500 महिलाओं ने एकरूपता के लिए समान साड़ियां धारण करने का संकल्प लिया।

सनातन शोभायात्रा विशेष आकर्षण रही

सर्व ब्राह्मण युवा संगठन द्वारा निकाली गई सनातन शोभायात्रा को इस बार विशेष रूप से भव्य और आकर्षक बनाया गया। बापट चौराहा से निकलने वाली यह यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए पुनः वहीं पहुंची। विधायक रमेश मेंदोला, संयोजक योगेश मिश्रा, अध्यक्ष संदीप जोशी, यात्रा प्रभारी मनोज मिश्रा सहित अनेक पदाधिकारी आयोजन को लेकर सक्रिय रहे।

परशुराम वाटिका में हुए धार्मिक अनुष्ठान

भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर परशुराम वाटिका मरीमाता चौराहे पर विगत 10वें वर्ष भी भगवान का पूजन, अभिषेक, पंचामृत का अभिषेक, हवन हुआ। संजय शुक्ला, सागर शुक्ला, अनु बाजपेयी, पंडित अनूप शुक्ला, पंडित पप्पू शुक्ला, ओ.पी. मिश्रा, दीपक शुक्ला, प्रकाश शर्मा, पप्पू मनीष मिश्रा सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।



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