मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की ड्राफ्ट सूची जारी होते ही सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि SIR के तहत जितने वोट काटे गए, उनसे कम अंतर से पार्टी विधानसभा चुनाव हारी थी। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (पीसीसी) में हुई प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री और कांग्रेस SIR कमेटी के प्रभारी सज्जन सिंह वर्मा तथा कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य व पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान 33 कर्मचारियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और निर्वाचन आयोग की है। उन्होंने दावा किया कि वे विधानसभा चुनाव में 15 हजार वोटों से हारे, जबकि उनकी विधानसभा सीट पर 16 हजार वोट काट दिए गए। पटेल ने सवाल किया कि इससे क्या साबित होता है।

32 लाख से हारे, 43 लाख नाम कटे

सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव में करीब 32 लाख वोटों से हारी थी, लेकिन अब SIR प्रक्रिया में 43 लाख से अधिक वोट हटा दिए गए हैं। जबकि साढ़े आठ लाख वोट नो मैपिंग हैं। उन्होंने इसे चुनाव आयोग पर सीधा आरोप बताया। वर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी SIR की प्रक्रिया होती थी, लेकिन कभी इतनी अव्यवस्था और उथल-पुथल नहीं देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आने के बाद SIR को राजनीतिक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।

बिहार मॉडल दोहराने का आरोप

वर्मा ने दावा किया कि बिहार में जिस तरह चुनाव आयोग के जरिए काम किया गया, वही तरीका मध्य प्रदेश में भी अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि कई बीएलओ की मौत हुई है और कांग्रेस के पास इससे जुड़ी पूरी सूची मौजूद है। वर्मा ने आरोप लगाया कि हजारों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जीतू पटवारी को विधानसभ में साजिश के तहत हराया गया। पटवारी की विधानसभा सीट पर 37 हजार वोट काटे गए, जबकि वे 33 हजार वोटों से चुनाव हारे।

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बूथ बदले गए, BLA को अंधेरे में रखा गया

वर्मा ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान कई मतदान केंद्रों में बदलाव किए गए, लेकिन नए बूथों पर न तो बीएलए की नियुक्ति की गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फिलहाल कुल 71,930 मतदान केंद्र हैं, जिनमें 65,014 पूर्व अनुमोदित, 6,704 नए (1200 से अधिक मतदाताओं वाले), 230 नए (2 किमी से अधिक दूरी वाले) और 18 विलोपित केंद्र शामिल हैं।

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चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जे.पी. धनोपिया ने कहा कि ड्राफ्ट सूची जारी करते समय यह आश्वासन दिया गया था कि मतदाता सूची की प्रतियां बीएलओ को उपलब्ध कराई जाएंगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने मांग की कि दावा–आपत्ति के निराकरण के दौरान कांग्रेस के बीएलए को भी साथ में बैठाया जाए, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष रह सके। ज्जन सिंह वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस द्वारा दर्ज आपत्तियों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो पार्टी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक और न्यायिक रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी।



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