आज के दौर में जहां गायों की उन्नत नस्लें जैसे साहीवाल या गिर बेहतरीन दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं, लेकिन जिले के किसान इन सभी उन्नत नस्लों की गा …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के क्षेत्र में जिले के किसानों का मिजाज तेजी से बदल रहा है। आज के दौर में जहां गायों की उन्नत नस्लें जैसे साहीवाल या गिर बेहतरीन दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं, लेकिन जिले के किसान इन सभी उन्नत नस्लों की गायों को छोड़ दूध उत्पादन के लिए भैंस पालने को ही तरजीह दे रहे हैं। इस रोचक तथ्य का खुलासा सरकार की महत्वाकांक्षी “कामधेनु योजना” के तहत आए आवेदनों से हुआ है। जिले में पशुपालन के लिए ऋण लेने के लिए आवेदन करने वाले शत-प्रतिशत किसानों ने केवल भैंस पालन में ही रुचि दिखाई है।
क्या है कामधेनु योजना: 42 लाख तक का ऋण और भारी सब्सिडी
पशुपालन विभाग द्वारा संचालित कामधेनु योजना के तहत पशुपालकों को डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए 42 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसमें सामान्य और अन्य वर्गों के लिए 33 प्रतिशत तक की सब्सिडी का भी प्रावधान है। योजना की शर्त है कि किसान को एक ही प्रजाति के कम से कम 25 पशु पालने होते हैं। कामधेनु योजना के तहत जिले से अब तक कुल 59 किसानों ने ऋण के लिए आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इन सभी 59 आवेदकों ने “भैंस वंशीय” पशुपालन को ही चुना है।
आवेदन और लक्ष्य की स्थिति: 16 प्रकरणों को मिली मंजूरी
जिले में कामधेनु योजना के तहत 22 पशु पालकों को लोन देने का टारगेट विभाग को दिया गया है, जबकि योजना के तहत 59 पशु पालकों ने आवेदन किया है। इसमें से अभी तक भोपाल से मंजूर होकर 16 प्रकरण आए हैं। इन प्रकरणों को किसानों के समीप की बैंकों में लोन के लिए भेजा गया है, जहां पर किसानों को लोन देने के लिए प्रक्रिया चल रही है। साथ ही जैसे-जैसे भोपाल से प्रकरण मंजूर होकर आते जा रहे हैं, उन्हें बैंकों में भेजा जा रहा है।
आखिर क्यों है भैंस पहली पसंद?
पशुपालकों के बीच भैंस की लोकप्रियता के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण सामने आए हैं…
- दूध में फैट की मात्रा: ग्वालियर के स्थानीय बाजारों में दूध की कीमत अक्सर उसमें मौजूद फैट (वसा) के आधार पर तय होती है। भैंस के दूध में गाय की तुलना में अधिक फैट होता है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं।
नस्ल सुधार के बावजूद गायों से दूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार लगातार गायों की नस्ल सुधारने और उन्हें दुग्ध उत्पादन का मुख्य केंद्र बनाने का प्रयास कर रही है। लेकिन कामधेनु योजना के ये नतीजे बताते हैं कि धरातल पर किसान अभी भी भैंस पालन को ही सुरक्षित और मुनाफे का सौदा मान रहे हैं।
जिले में कामधेनु योजना के तहत 59 पशु पालक किसानों ने आवेदन किया है। इनमें से आवेदनों को वेरीफाई करके भोपाल से 16 प्रकरणों को मंजूरी मिली है और उन्हें बैंकों में भेजा गया है। सभी आवेदनों में किसानों ने भैंस पालन के लिए ही आवेदन किया है, गाय पालन के लिए नहीं किया है। – डॉ. उमेश दांतरे, उप संचालक, पशु चिकित्सा व पशु पालन विभाग
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