आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया अब करदाताओं के लिए सिरदर्द नहीं रहेगी। आयकर विभाग ने तकनीक का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक कदम उठाया ह …और पढ़ें

HighLights
- आयकर दाताओं का डिजिटल दोस्त AI ‘कर साथी’
- अब 24 घंटे मिलेगा टैक्स संबंधी शंकाओं का समाधान
- रीयल-टाइम में मिलेंगे आयकर से जुड़े सवालों के जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया अब करदाताओं के लिए सिरदर्द नहीं रहेगी। आयकर विभाग ने तकनीक का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक कदम उठाया है। विभाग ने ‘कर साथी’ नाम से एक एआई आधारित चैटबॉट पेश किया है। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और कर से जुड़े कठिन नियमों, प्रपत्रों (फॉर्म) और जमा करने की प्रक्रिया को अत्यंत सरल भाषा में समझाएगी। ग्वालियर के व्यापारिक और वेतनभोगी वर्ग के लिए यह सुविधा एक डिजिटल मार्गदर्शक की तरह काम करेगी।
क्या है कर साथी और इसकी आवश्यकता क्यों?
कर साथी आयकर विभाग के नए पोर्टल का एक अभिन्न अंग है। इसे विशेष रूप से करदाताओं के मन में उठने वाले तत्काल प्रश्नों के उत्तर देने और रिटर्न भरने के अनुभव को सहज बनाने के लिए विकसित किया गया है। अक्सर देखा गया है कि अधूरी या अस्पष्ट जानकारी के कारण लोग रिटर्न भरने में देरी करते हैं या गलतियां कर बैठते हैं। सीए आशीष पारेख के मुताबिक यह चैटबॉट उस समस्या को खत्म कर देगा जहां करदाताओं को छोटी-छोटी जानकारी के लिए परेशान होना पड़ता था। यह करदाताओं को उनकी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से समझने में सहायता करेगा।
एक ही स्थान पर मिलेंगी सारी सुविधाएं
यह एआई चैटबॉट आयकर विभाग की नई वेबसाइट के साथ मिलकर कार्य करता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां प्रपत्र, चालान, ई-भुगतान और ई-सत्यापन जैसी सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। अब करदाताओं को अलग-अलग वेब पृष्ठों पर भटकने की आवश्यकता नहीं होगी। यह रीयल-टाइम में जवाब देता है, जिससे छोटे-मोटे संदेहों के लिए बाहर के सलाहकारों पर निर्भरता कम हो जाएगी।
कठिन शब्दों से मुक्ति और सटीक मार्गदर्शन
आयकर कानून में उपयोग होने वाले शब्द अक्सर आम लोगों के लिए समझना कठिन होते हैं। कर साथी इन कठिन शब्दों, नए कर स्लैब और छूट (डिडक्शन) को बेहद सरल भाषा में समझाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपयोगकर्ताओं को रिटर्न भरने के दौरान चरण-दर-चरण निर्देश देता है, जिससे संभावित गलतियों की पहचान पहले ही हो जाती है। इससे गलत रिटर्न भरने के कारण लगने वाले जुर्माने का जोखिम भी न्यूनतम हो जाता है।
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आम नागरिक और लघु उद्योगों को लाभ
यह सुविधा विशेष रूप से आम लोगों और ग्वालियर के छोटे व्यवसायियों के लिए वरदान सिद्ध होगी। यह आयकर विभाग के दृष्टिकोण में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है। अब विभाग का मुख्य बल केवल दंड लगाने पर नहीं, बल्कि करदाताओं को अनजाने में होने वाली गलतियों से रोकने पर है, ताकि समस्या उत्पन्न होने से पहले ही उसका समाधान खोजा जा सके। ग्वालियर के करदाता अब किसी भी समय, चाहे वह आधी रात ही क्यों न हो, अपनी शंकाओं का समाधान इस डिजिटल मित्र से प्राप्त कर सकेंगे।
