जब भी विश्व में आपात स्थिति या युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो उससे पहले सोने के भावों में तेजी देखने को मिलती है। हाल ही में हमने सोने की नई ऊंची कीमतें तय होते देखीं। दरअसल, सोना सबसे मजबूत निवेश माना जाता है। हमारे देश में तो सोने का पारंपरिक महत्व भी है। अभी भले ही सोने के भाव टूटे हैं, लेकिन आने वाले समय में भाव और बढ़ेंगे। पहले जब सोने की कीमत 1 लाख रुपये प्रति दस ग्राम हुई थी, तब भी ऐसा कहा गया था। उस समय दाम कम हुए, लेकिन उसके बाद फिर तेजी आई। सोना आज भी शेयर या प्रॉपर्टी की तुलना में मजबूत निवेश है।


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यह बात इंडियन एसोसिएशन ऑफ गोल्ड एक्सीलेंस एंड स्टैंडर्ड्स (आईजीईएस) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कौशलेन्द्र सिन्हा ने कही। वे इंदौर प्रवास पर आए थे। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों में सोना खरीदना सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। शादियों में सोने का उपहार सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन देश में सोने का कारोबार काफी बिखरा हुआ है। कई बार ग्राहकों को भरोसा नहीं रहता कि वे जो सोना खरीद रहे हैं, वह शुद्ध है या नहीं। इस कारण इन छोटे व्यापारियों को भी संस्थान द्वारा सोने को लेकर तय मान्यता प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।

 

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अक्सर यह कहा जाता है कि जलगांव, रतलाम या अन्य किसी शहर का सोना अच्छा होता है, लेकिन ग्राहकों को कभी भी रंग से सोने का आकलन नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी ग्राहक सोना खरीदें, तो वे आभूषण बनाने के चार्ज अलग से बिल में लिखवाएं। कई बार दुकानदार बनवाई को जोड़कर बताते हैं।



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