इंदौर में आज से चिकित्सा जगत के एक महत्वपूर्ण समागम RSACPCON 2026 की शुरुआत हो गई है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर के प्रतिष्ठित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ एकत्रित हुए हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सर्जरी की प्रक्रिया को मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित और पूरी तरह से दर्द-मुक्त बनाना है। सम्मेलन में आधुनिक शोध और तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है ताकि चिकित्सा सेवाओं के स्तर को वैश्विक मानकों तक पहुंचाया जा सके।

रिसर्च से इलाज तक की थीम पर केंद्रित है पूरा मंथन

इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य सूत्र रिसर्च से इलाज तक रखा गया है। इसके माध्यम से विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रयोगशालाओं में होने वाले नवीन शोध केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा लाभ आम मरीजों को मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खोजों का वास्तविक मूल्य तभी है जब वे ऑपरेशन थिएटर में जीवन बचाने के काम आएं और जटिल सर्जरी को सरल बना सकें।

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मरीजों की सुरक्षा और विश्वास पर जोर रहेगा

आयोजन अध्यक्ष प्रो. डॉ. किशोर अरोड़ा ने बताया कि एनेस्थीसिया विभाग का प्राथमिक लक्ष्य ऑपरेशन थिएटर के बाहर प्रतीक्षा कर रहे परिजनों को निश्चिंतता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक की उपलब्धता से अब हर सर्जरी के दौरान सुरक्षा का स्तर पहले से कहीं अधिक बेहतर हो गया है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ न केवल मरीज को बेहोश करते हैं, बल्कि पूरी शल्य चिकित्सा के दौरान मरीज के जीवन रक्षक की भूमिका निभाते हुए हर धड़कन और सांस की निगरानी करते हैं।

युवा डॉक्टरों का कौशल विकास करना बड़ी जिम्मेदारी

आयोजन सचिव डॉ. मीनू चड्ढा ने जानकारी दी कि इस मंच पर विश्व के सबसे अनुभवी चिकित्सक अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इस सम्मेलन से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले युवा डॉक्टर भविष्य में लाखों लोगों को सुरक्षित चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होंगे। एकेडमी की चेयरपर्सन डॉ. साधना संवतसरकर ने इस बात पर बल दिया कि विज्ञान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, जिससे छोटे केंद्रों पर भी विश्व स्तरीय सुरक्षा मिल सके।

इंदौर के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाओं का उदय होगा

साइंटिफिक चेयरपर्सन डॉ. हर्षा फुलंबरीकर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की उपस्थिति इंदौर के चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। वहीं वर्कशॉप चेयरपर्सन डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि डॉक्टरों को नई तकनीकों में प्रशिक्षित करना हमारा मिशन है ताकि सर्जरी की जटिलताओं को कम किया जा सके। 12 अप्रैल तक चलने वाला यह महाकुंभ चिकित्सा जगत में सेवा और सुरक्षा के नए मापदंड स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



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