धार की भोजशाला मामले में गुरुवार को हिंदू पक्ष की सुनवाई पूरी हुई। अब अन्य पक्षों को अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर शुक्रवार को मिलेगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट में भी मंदिर होने के प्रमाण मिलते हैं। भोजशाला में पूजा का पूर्ण अधिकार हिंदू समाज को दिया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई द्वारा 98 दिनों तक किए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट पर विशेष जोर दिया। कोर्ट को बताया गया कि लगभग 2100 पृष्ठों की यह रिपोर्ट वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन पर आधारित है, जिसे कोर्ट के निर्देश पर तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट में स्मारक के मंदिर होने के कई प्रमाण और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।
वकील ने यह भी बताया कि वर्ष 1904 में लॉर्ड कर्जन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी इस स्थल के मंदिर होने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।कोर्ट के समक्ष राम जन्मभूमि निर्णय के पैराग्राफ 675 से 679 का हवाला देते हुए कहा गया कि एएसआई की रिपोर्ट को वैज्ञानिक सर्वेक्षण के रूप में विधिक मान्यता दी जानी चाहिए। धार भोजशाला में जीपीएस, जीपीआर और कार्बन डेटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से 50 मीटर की परिधि में, दोनों पक्षों की उपस्थिति में सर्वेक्षण किया गया।
एएसआई की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यह स्मारक 11वीं–12वीं शताब्दी का परमार कालीन संरचना है। यह भी कहा गया कि मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर इसे मस्जिद में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया। संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेखों को मिटाकर पुनर्निर्माण में उपयोग किया गया, तथा मनुष्य और पशुओं की आकृतियों को भी नष्ट कर दिया गया, जबकि ऐसी आकृतियाँ मस्जिदों में नहीं पाई जातीं।
