नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जया आरोग्य चिकित्सालय (जेएएच) समूह में आने वाले हजारों गंभीर मरीजों को एक ही छत के नीचे इलाज देने का सपना फिलहाल कागजों और अधूरे निर्माण के बीच फंसा हुआ है। माधव डिस्पेंसरी के सामने निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉक (इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट) प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण एजेंसी की सुस्ती का नमूना बन चुका है।

डेडलाइन तीसरी बार बढ़ा दी गई

आलम यह है कि जिस भवन को पिछले साल ही जनता की सेवा में शुरू होना चाहिए था, उसकी डेडलाइन तीसरी बार बढ़ा दी गई है। एक साल पहले चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने खुद मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का जायजा लिया था। उस समय ठेकेदार ने जुलाई 2025 तक काम पूरा करने का भरोसा दिया था।

जब यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो दूसरी डेडलाइन दिसंबर 2025 तय की गई। अब साल 2026 के चार महीने बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है और नई समयसीमा मई 2026 तक तय की गई है।

साढ़े 16 करोड़ का बजट, फिर भी अधूरा काम

शासन ने इस परियोजना के लिए करीब साढ़े 16 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। इतनी बड़ी राशि और “क्रिटिकल” श्रेणी का प्रोजेक्ट होने के बावजूद निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी रही। जानकारी के अनुसार बीच में बजट की कमी के कारण काम रुक गया था। फिलहाल ईटीपी प्लांट, सेफ्टी टैंक, ऑक्सीजन प्लांट सहित कई महत्वपूर्ण कार्य अभी भी अधूरे हैं, जिससे भवन के जल्द शुरू होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मरीज भटकने को मजबूर, गोल्डन आवर पर खतरा

जेएएच में हर साल 8 से 10 हजार गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस यूनिट का उद्देश्य था कि मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकना न पड़े और एक ही छत के नीचे विशेषज्ञ इलाज मिल सके। लेकिन निर्माण में देरी के कारण मरीजों को अब भी स्ट्रेचर पर एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाना पड़ रहा है। इससे कई बार “गोल्डन आवर” में इलाज न मिलने से मरीजों की जान पर भी बन आती है।



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