झांसी रोड इलाके में अपने जवान बेटे की हत्या करने वाला पिता अपने दूसरे बेटे के साथ पुलिस हिरासत में फूट-फूटकर रोता रहा। वह बार-बार कह रहा था, बेटा शराब …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। झांसी रोड इलाके में अपने जवान बेटे की हत्या करने वाला पिता अपने दूसरे बेटे के साथ पुलिस हिरासत में फूट-फूटकर रोता रहा। वह बार-बार कह रहा था, “बेटा शराब का इतना नशा करने लगा था- किसी के साथ भी मारपीट करता था। उस पर भी हाथ उठाया, इसी गुस्से में छोटे भाई ने हाथ पकड़े तो गुस्से में गला घोंट दिया।” वह बेटे को मारना नहीं चाहता था, उसके जाने के बाद एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था। हत्या को आत्महत्या बताने के सवाल पर वह चुप्पी साध जाता है, फिर रोने लगता है। पुलिस ने दोनों पर एफआइआर दर्ज कर इन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
आत्महत्या का रचा था स्वांग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज
झांसी रोड थाना क्षेत्र के अंतर्गत पारदी मोहल्ला में रहने वाले राजू यादव के दो बेटे रिंकू यादव और गौरव थे। रिंकू बड़ा था और वह शराब पीने का आदी था। चार मार्च को उसकी हत्या कर दी गई थी। भाई गौरव ने हाथ पकड़े और राजू ने गला घोंटकर उसे मार डाला। इस घटना को इन लोगों ने आत्महत्या बताया था और पुलिस को भी आत्महत्या की ही सूचना दी थी। शनिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस अधिकारी दंग रह गए, क्योंकि मामला गला घोंटकर हत्या का निकला। जब इन दोनों को हिरासत में लिया गया, तो उन्होंने रात को हत्या करना स्वीकार किया।
पत्नी को घसीटकर पीटने और विरोध पर पिता पर हमले से उपजा गुस्सा
आरोपितों ने बताया कि रिंकू सुबह से ही शराब पीता था और रात को शराब पीकर घर पहुंचता था तथा हंगामा करता था। चार मार्च को उसने हद पार कर दी। पहले तो उसने पत्नी को घसीट-घसीटकर पीटा, इसके बाद जब उसे रोका गया तो उसने पिता पर ही हमला कर दिया। यह बात गौरव को नागवार गुजरी, तो गौरव ने उसके हाथ पकड़ लिए। इसके बाद राजू ने उसका गला घोंट दिया। इस मामले में झांसी रोड थाना पुलिस ने शनिवार देर रात हत्या की एफआइआर दर्ज की और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
घर की दहलीज पर सिर्फ महिलाओं का विलाप
इस दुखद घटना के बाद घर पर महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा परिवार ही खत्म हो गया है। रिंकू दुनिया छोड़ गया, जबकि उसकी हत्या करने के आरोप में पिता राजू यादव और भाई गौरव यादव सलाखों के पीछे पहुंच गए हैं। अब घर में कोई पुरुष नहीं बचा है। महिलाओं का विलाप थमने का नाम नहीं ले रहा है।
