पिछले आठ साल से चल रहे लगभग 187 किमी लंबे ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा में और बढ़ोतरी हो सकती है। ये प्रोजेक्ट पूरा हो …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 05 Apr 2026 11:00:37 AM (IST)Updated Date: Sun, 05 Apr 2026 11:01:31 AM (IST)

ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज: इंतजार की घड़ी और लंबी हुई, मार्च 2027 तक खिंच सकता है प्रोजेक्ट
ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट पर अपडेट आया है

HighLights

  1. बढ़ सकती है श्योपुर ब्राडगेज प्रोजेक्ट की समय सीमा
  2. दिसंबर 2026 तक पूरा होना है काम, समय बढ़ने के आसार
  3. अभी ग्वालियर से कैलारस तक मेमू ट्रेन चल रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पिछले आठ साल से चल रहे लगभग 187 किमी लंबे ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा में और बढ़ोतरी हो सकती है। ग्वालियर-श्योपुर ब्राडगेज परियोजना वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन बजट में देरी से यह काम मार्च 2020 के बाद ही धरातल पर उतर सका। पहले लक्ष्य मार्च 2025 रखा था, जिसमें कार्य पूरा नहीं हो सका। अब रेलवे ने दिसंबर 2026 तक श्योपुर तक ब्रॉडगेज लाइन पूरी करने का दावा किया है।

अभी ग्वालियर से कैलारस तक मेमू ट्रेन चल रही है। कैलारस-सबलगढ़ सेक्शन में निरीक्षण के बावजूद ट्रेन शुरू नहीं हो सकी है। इसके बाद ट्रेन का संचालन वीरपुर और फिर श्योपुर तक किया जाएगा। वर्तमान में श्योपुर तक ट्रैक व ओएचई लाइन का काम धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में रेलवे के प्रयागराज स्थित मुख्यालय तक इसकी रिपोर्ट गई है, जिसके बाद संभावना है कि तीन माह के लिए इस प्रोजेक्ट की समय सीमा को बढ़ाकर मार्च 2027 कर दिया जाए। ये प्रोजेक्ट पूरा होने से ग्वालियर-चंबल संभाग के विभिन्न जिलों में रहने वाले यात्रियों का काफी लाभ मिलेगा।

इसका कारण है कि पूर्व में जब इस रूट पर नैरोगेज ट्रेन का संचालन होता था, तो इसे अंचल की लाइफलाइन माना जाता था। इसका कारण है कि श्योपुर से लेकर ग्वालियर के बीच परिवहन के साधन कम उपलब्ध होने के कारण लोग नैरोगेज ट्रेन से यात्रा करते थे। इसमें काफी समय लगता था, जिसके कारण नैरोगेज ट्रैक को ब्राडगेज में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया था। इससे यात्रियों का सफर तेज होगा और वे कम समय में अंचल के सुदूर जिलों तक पहुंच सकेंगे।

ये भी बनेंगे देरी के कारण

वर्तमान में ग्वालियर से कैलारस तक मेमू ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। हालांकि वीरपुर तक रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) का निरीक्षण हो चुका है, लेकिन ओएचई लाइन का काम बाकी है। यदि ट्रेन का विस्तार सबलगढ़ या वीरपुर तक किया जाता है, तो रैक में कोचों की संख्या बढ़ानी पड़ेगी। इससे समस्या यह खड़ी होगी कि ग्वालियर यार्ड में इस ट्रेन को खड़ा करने की जगह अपर्याप्त है, क्योंकि वहां ओएचई लाइन सीमित लंबाई में है। ऐसे में ओएचई की लंबाई भी बढ़ानी पड़ेगी। इसके लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन फिलहाल उस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है।



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