शिक्षा से पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ते हुए ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने अभिनव पहल की है। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज …और पढ़ें

HighLights
- MP के कृषि छात्रों के लिए नया नियम।
- 4 साल तक पौधे की करनी होगी देखरेख।
- डिग्री के साथ मिलेगा ग्रीन ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शिक्षा से पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ते हुए ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने अभिनव पहल की है। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बीएससी (कृषि) पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को एक-एक पौधा रोपना और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी लेनी होगी।
इसके आधार पर विद्यार्थियों को डिग्री के साथ ग्रीन ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय ने नवागत छात्रों के लिए ‘ग्रीन ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट’ योजना की शुरुआत की है।
522 छात्र-छात्राओं को मिली जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश में विश्वविद्यालय से संबद्ध ग्वालियर, इंदौर, सीहोर, खंडवा और मंदसौर जिलों में स्थित कृषि महाविद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2025-26 में 522 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।
विश्वविद्यालय की डीन डा. मृदुला बिल्लौरे ने बताया कि योजना के अनुसार इन सभी महाविद्यालयों के परिसर में विद्यार्थियों को एक-एक पौधा रोपना अनिवार्य होगा। चार वर्ष में डिग्री पूरी होने तक पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी छात्र की होगी।
शनिवार को होगी पौधों की देखभाल
छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शनिवार का दिन पौधों की देखभाल के लिए सुरक्षित रखा गया है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है। इस योजना को गंभीरता से लागू करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ नियम भी बनाए हैं। इसके अंतर्गत यदि किसी कारणवश छात्र द्वारा लगाया गया पौधा सूख जाता है या खराब हो जाता है, तो उसे परिसर में दूसरा नया पौधा रोपना होगा। छात्र को ग्रीन ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट तभी दिया जाएगा, जब उसका पौधा जीवित और स्वस्थ होगा।
प्रकृति से जुड़ाव और जिम्मेदारी का संदेश
कुलगुरु (कुलपति), कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर डा. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि “ग्रीन ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट योजना का उद्देश्य छात्रों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत कृषि के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना है। जब छात्र अपने हाथों से रोपे गए पौधे को बढ़ते देखेंगे, तो उनका जुड़ाव प्रकृति के साथ और गहरा होगा।”
