मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) में चल रहा प्रांताध्यक्ष पद का विवाद अब खत्म हो गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (कर्मचारी कल्याण) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए चौधरी मुकेश मौर्य को वैधानिक प्रांताध्यक्ष और आईएएस विशेष गढ़पाले को कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष के रूप में मान्यता दी है। प्रांतीय सचिव डॉ. अनिल अर्गल ने बताया कि रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी, भोपाल द्वारा मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों के प्रांताध्यक्षों की सूची विधानसभा पटल पर रखी गई थी। इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग को अवगत कराया गया कि कुछ लोग संगठन के नाम का गलत उपयोग कर भ्रम फैला रहे हैं। इसके बाद विभाग ने पत्र जारी कर सभी शासकीय विभागों को निर्देश दिए कि चौधरी मुकेश मौर्य को प्रांताध्यक्ष और विशेष गढ़पाले को कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष मानते हुए उनसे ही पत्राचार किया जाए। 

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संगठन मिलकर करेगा काम

प्रांताध्यक्ष मुकेश मौर्य और कार्यवाहक प्रांताध्यक्ष विशेष गढ़पाले ने कहा कि संगठन सभी को साथ लेकर काम करेगा। उनका लक्ष्य अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ समाज को मजबूत बनाना और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।  

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योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

संगठन ने तय किया है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही छात्रावासों में एससी-एसटी विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी भी की जाएगी। संगठन की गतिविधियों को बेहतर ढंग से चलाने के लिए भोपाल स्थित अजाक्स भवन में जल्द ही प्रांतीय और जिला पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की जाएगी।

 

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IAS संतोष वर्मा ने उठाए सवाल

वहीं, आईएएस संतोष वर्मा ने इस पूरे मामले पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि किसी संगठन के प्रांताध्यक्ष को तय करने का अधिकार सरकार या सामान्य प्रशासन विभाग के पास नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग और रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी के पास अपील लंबित है। वर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2023 में जेएन कंसोटिया के प्रांताध्यक्ष रहते हुए मुकेश मौर्य कैसे इस पद पर आए। उनके मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग ने जिस पत्र के आधार पर यह मान्यता दी है, वह केवल संबंधित व्यक्तियों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित संवाद है, इससे विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।



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