दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद सियासत तेज हो गई है। इस मामले में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मंत्री सारंग ने कहा कि विधानसभा सचिवालय द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह न्यायसंगत और विधिसंगत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब हर संवैधानिक प्रक्रिया का विरोध करने की आदी हो चुकी है। एक ओर कांग्रेस नेता संविधान की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं।

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भ्रष्टाचारी को बचाने का प्रयास, गैर कानूनी है 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व विधायक पीसी शर्मा विधानसभा के सदस्य नहीं होने के बावजूद असंवैधानिक तरीके से विधानसभा परिसर में पहुंचे और एक “भ्रष्टाचारी” को बचाने की कोशिश की, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। मंत्री सारंग ने बताया कि राजेंद्र भारती का मामला गंभीर भ्रष्टाचार से जुड़ा है। यह प्रकरण उस समय का है जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारती ने अपनी माताजी के खाते के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की और अदालत को भ्रमित करने का भी प्रयास किया। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई दिल्ली की अदालत में हुई, जहां सबूतों के आधार पर भारती को दोषी ठहराया गया और उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

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जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में सदस्यता स्वत: समाप्त 

सारंग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है और वह छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाता है। इसी प्रावधान के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय पवई से भाजपा विधायक प्रह्लाद लोधी की सदस्यता भी इसी नियम के तहत समाप्त की गई थी।

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शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया 

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जीतू पटवारी और पीसी शर्मा ने विधानसभा में गैरकानूनी तरीके से प्रवेश कर सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की, जो दंडनीय अपराध है। अंत में सारंग ने कहा कि इस मामले में कोई स्टे नहीं है और कानून के अनुसार कार्रवाई हुई है। उन्होंने दोहराया कि भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति विधानसभा में बैठने के योग्य नहीं है।

 



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