प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदलते हुए कहर बरपाना शुरू कर दिया। सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में अचानक तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। नीमच और उज्जैन में बारिश के साथ ओले गिरे, जबकि भोपाल, मंदसौर, रीवा और बैतूल जिलों समेत कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई। वहीं, इंदौर और धार में दिनभर बादल छाए रहे और हल्की वर्षा भी हुई। ओले गिरने से गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। धार और श्योपुर में बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली, वहीं खेतों में कटी पड़ी फसल के खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।
उज्जैन में झमाझम बारिश
उज्जैन में सोमवार दोपहर गर्मी और उमस के बाद शाम को मौसम अचानक बदल गया। आसमान में बिजली कड़की और तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गई। बड़नगर और ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
धार के डही में आधे घंटे बारिश, ओले गिरे
धार के ग्रामीण क्षेत्रों, कुक्षी ब्लॉक के कुछ हिस्सो में बे-मौसम बारिश हुई है। डही क्षेत्र में कुछ देर ओले गिरने की सूचना है। डही, कुक्षी और बाग क्षेत्र में सोमवार दोपहर बाद मौसम में अचानक बदलाव देखा गया। डही में आधे घंटे तक झमाझम बारिश के साथ ओले गिरे, जबकि कुक्षी में हल्की बूंदाबांदी हुई। दोपहर 3 बजे के आसपास मौसम का मिजाज बदला। कुछ देर बाद ही बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई दी और तेज हवाएं चलने लगीं।
नीमच-मनासा रोड पर ओले की परत बिछी
नीमच में सोमवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट ली। चिलचिलाती धूप के बीच घने बादल छाए और तेज बारिश के साथ जोरदार ओलावृष्टि हुई, जिससे नीमच-मनासा रोड पर सड़कों पर सफेद परत बिछ गई। मार्च के अंत में मौसम के इस बदलाव ने लोगों को चौंका दिया। देखते ही देखते बड़े-बड़े ओले गिरने लगे, जिससे सड़क पर खड़े वाहन बर्फ जैसी परत से ढक गए। खराब दृश्यता के कारण वाहन चालकों को लाइटें जलाकर रुकना पड़ा। खेतों में खड़ी और खलिहानों में रखी फसलों को ओलावृष्टि से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
इस वजह से बिगड़ा मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी, पश्चिमी विक्षोभ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के एक्टिव होने से प्रदेश में यह बदलाव आया है। यह सिस्टम अगले 3 से 4 दिनों तक सक्रिय रहेगा और 2 अप्रैल तक असर दिखाएगा।
