नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। काल कब, कहां किस रूप में सामने आ जाए, कोई नहीं जानता। ग्वालियर के थाटीपुर इलाके में भीषण सड़क हादसे ने न केवल पांच जिंदगियों को लील लिया, बल्कि हंसते-खेलते परिवार को ही उजाड़ कर रख दिया। हंसता-खेलता परिवार नजदीकी रिश्तेदारों के साथ शीतला माता मंदिर के दर्शन के लिए निकला था, लेकिन लौटते समय उनका ऑटो हादसे का शिकार हो गया। एक स्कॉर्पियो कार ने ऑटो को टक्कर मार दी।
इस दृश्य को जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप उठी। हादसा था ही इतना वीभत्स…मृतकों के शव आटो के अंदर फंसे हुए थे। सड़क पर बिखरा इनका सामान, मासूम बच्चों के खिलौने हृदय विदारक हादसे के चश्मदीद गवाह थे। इस हादसे ने एक ही परिवार की खुशियों पर ऐसा ग्रहण लगाया, जिस दर्द से यह परिवार कभी उबर नहीं सकेगा। एक ही घर से जब चार अर्थी एक साथ उठीं तो हर आंख नम हो गई।
परिजन ने थाटीपुर क्षेत्र में दो घंटे तक लगाया जाम
शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद स्वजन थाटीपुर रोड पर शव लेकर पहुंच गए। यहां शव रखकर चक्काजाम कर दिया। दोपहर ढाई बजे से शाम करीब 4.30 बजे तक दो घंटे तक जाम लगाए रखा। यहां स्वजन की मांग थी कि आरव और प्रियांश बेसहारा हो गए। इनके भविष्य के लिए आर्थिक मदद दी जाए, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
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एएसपी अनु बेनीवाल यहां पहुंची। स्वजन को समझाइश दी कि शासन से हरसंभव मदद कराई जाएगी। इस संबंध में शासन को प्रशासन की ओर से प्रस्ताव भेजा जाएगा। रेडक्रास से भी आर्थिक मदद अंतिम संस्कार के लिए दिलाई गई। इसके बाद स्वजन ने जाम खोल दिया। जाम के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
विधायक डा. सिकरवार अस्पताल पहुंचे, दी आर्थिक सहायता
थाटीपुर क्षेत्र के परशुराम चौराहे के पास सुबह सड़क हादसे में प्रभावित परिवार के बीच कांग्रेस विधायक डा. सतीश सिंह सिकरवार अस्पताल पहुंचे। विधायक डा. सिकरवार ने तुरंत प्रत्येक मृतक के स्वजन को 20-20 हजार रुपये यानी कुल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं घायलों को 10-10 हजार रुपये की राहत राशि सहायता प्रदान की है।
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कलेक्टर ने 10-10 हजार की तात्कालिक सहायता दी
सड़क दुर्घटना में मृत पांच लोगों के आश्रितों को जिला प्रशासन द्वारा रेडक्रास सोसाइटी से 10-10 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। साथ ही गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को भी 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तात्कालिक रूप से दी गई है। घटना की सूचना मिलने पर कलेक्टर रुचिका चौहान जेएएच के ट्रामा सेंटर पहुंचीं। उन्होंने महिला बाल विकास विभाग से मृतकों के बच्चों को योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू… बिलखते हुए मासूम, माता-पिता को तलाशती रहीं निगाहें
सबसे दर्दनाक पहलू शुभम और शगुन के दोनों मासूम बेटे आरव व प्रियांश का है। इनकी तो दुनिया ही उजड़ गई। दोनों मासूमों की दुनिया कल तक अपने माता-पिता के इर्द-गिर्द सिमटी थी। पिता का कंधा, मां की ममता अब सिर्फ यादों में ही रह गई। अस्पताल के गलियारे और शव घ आने के बाद जब दोनों को बिलख रहे तो सभी का कलेजा मुंह को आ रहा था। इन्हें भी चोट लगी है, दोनों माता-पिता के बारे में पूच रहे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं दे पा रहा था।
पिता चाहते- बेटी बने अफसर, टूट गए सारे सपने
इंद्रजीत और उनकी पत्नी लीला को अपी बेटी प्रीति पर नाज था। प्रीति एक निजी बैंक में नौकरी करती है। उसके भी पैर में फ्रैक्चर है। पिता चाहते थे, वह अफसर बने। एक ही पल में उसने माता-पिता को खो दिया। कल तक जो खुशी माता-पिता के साथ होने की थी, अब सिर्फ आंख में उन्हें खोने का गम है।
