मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व में कोर क्षेत्र के भीतर धार्मिक मेले के आयोजन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, राज्य सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) को शिकायत भेजकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि 19 से 27 मार्च के बीच बालारी माता मंदिर परिसर में मेले के आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा दी गई, जिससे बड़ी संख्या में लोगों, वाहनों और संसाधनों का प्रवेश टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्र में हुआ।  माधव टाइगर रिजर्व में हाल ही में बाघों के पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि यह वही क्षेत्र है जहां बाघ छोड़े गए थे और इस तरह की गतिविधियां वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकती हैं।

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वन्यजीव कानून उल्लंघन के आरोप

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे में शिकायत में दावा किया गया है कि इस आयोजन के दौरान कई तरह की गतिविधियां सामने आईं, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण कानून के खिलाफ बताया गया है। इनमें पशु बलि, भीड़भाड़, शोर-शराबा और प्लास्टिक प्रदूषण जैसी बातें शामिल हैं। साथ ही, कुश्ती प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों के आयोजन को भी सवालों के घेरे में रखा गया है।

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कोर जोन में खाना बनाते लोग
– फोटो : अमर उजाला


टाइगर रिजर्व की सुरक्षा पर सवाल

मामले में वन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने इस आयोजन का विरोध नहीं किया और न ही इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाया। शिकायतकर्ताओं ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

शिकायत में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में इस तरह के आयोजनों पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी सख्ती दिखाई है। ऐसे में कोर क्षेत्र में मेला आयोजित करना अदालत के निर्देशों के खिलाफ बताया गया है।

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कोर जोन में लगा मेला
– फोटो : अमर उजाला


टाइगर रिजर्व में आठ बाघ हैं 

मध्य प्रदेश के चंबल में स्थित माधव राष्ट्रीय उद्यान को मार्च 2025 में मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बनाया गया। यह विंध्य की पहाड़ियों का हिस्सा हैं। ऐतिहासिक रूप से यह ग्वालियर के महाराजा की शिकारगाह हुआ करता था। इसे 1958 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। टाइगर रिजर्व में आठ बाघ हैं। 

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क्या होता है कोर एरिया 

टाइगर रिजर्व को दो मुख्य भागों में बांटा जाता हैं। एक कोर एरिया और दूसरा बफर जोन। इसमें कोर एरिया टाइगर रिजर्व का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा होता हैं। यहां बाघों का मुख्य निवास, प्रजनन, शिकार और आराम का क्षेत्र होता हैं। इस अपरिवर्तनीय माना जाता हैं, यानी यहां पर मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा जाता हैं ताकि बाघां की आबादी सुरक्षित रहे और बढ़ सकें। वहीं, बफर जोन कोर एरिया के चारों ओर का क्षेत्र होता है। यहां पर कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे पर्यटन, गांवों का विकास की अनुमति सख्त नियमों के साथ होती हैं। 

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दिशा निर्देशों के अनुसार मेले की अनुमति दी जाती है 

माधव टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि यह जिला प्रशासन और वन विभाग संयुक्त रूप से अनुमति देता हैं। वहां ऐतिहासक मंदिर है, जहां लंबे समय से मेला लगता रहा हैं। यह अनुमति पूरी दिशा निर्देशों के अनुसार जारी की जाती हैं। मेला जिला प्रशासन की देखरेख में आयोजित होता हैं। 

 




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