ग्वालियर में माहौरकर का बाड़ा विवाद में कोर्ट ने सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया। प्रतिवादी को कब्जा खाली कर बकाया किराया और खर्च चुक …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 27 Mar 2026 10:23:27 AM (IST)Updated Date: Fri, 27 Mar 2026 10:32:27 AM (IST)

सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट को सालों तक नहीं दिए 143 रुपये महीना, कोर्ट ने किराएदार से कहा- खाली करो संपत्ति
बाड़ा संपत्ति विवाद में आखिरकार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कोर्ट ने सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया
  2. प्रतिवादी को संपत्ति खाली कर कब्जा सौंपने का आदेश
  3. कई वर्षों से किराया नहीं देने का मामला सामने आया

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर के जयेंद्रगंज स्थित माहौरकर का बाड़ा संपत्ति विवाद में आखिरकार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में 20वें व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड, ग्वालियर के न्यायाधीश ओमप्रकाश परमार ने 25 मार्च को सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के पक्ष में निर्णय देते हुए विवादित संपत्ति को खाली कराने का आदेश दिया है।

कोर्ट के इस फैसले से ट्रस्ट को बड़ी राहत मिली है, वहीं प्रतिवादी पक्ष को अब न केवल कब्जा छोड़ना होगा बल्कि बकाया किराया और वाद व्यय भी चुकाना पड़ेगा। यह मामला किरायेदारी, स्वामित्व और बकाया भुगतान को लेकर वर्षों से न्यायालय में लंबित था।

ट्रस्ट ने पेश किए ठोस साक्ष्य

  • सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के सचिव राणा करण सिंह द्वारा शशि कुमार दुबे और श्रेया दुबे के खिलाफ यह वाद दायर किया गया था। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि माहौरकर का बाड़ा स्थित संपत्ति का एक हिस्सा 143 रुपये प्रतिमाह किराये पर स्वर्गीय पुत्तूलाल दुबे को दिया गया था।
  • उनके निधन के बाद शशि कुमार दुबे किरायेदार बने, लेकिन उन्होंने कई वर्षों तक किराया नहीं चुकाया। ट्रस्ट ने तीन अप्रैल 2021 को नोटिस जारी कर किरायेदारी समाप्त कर दी थी, बावजूद इसके न तो बकाया जमा किया गया और न ही संपत्ति खाली की गई।

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प्रतिवादी पक्ष का दावा खारिज

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने ट्रस्ट के स्वामित्व पर सवाल उठाए और किराया देने की कोशिश का दावा किया, लेकिन वे कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके विपरीत ट्रस्ट ने दस्तावेजों और गवाहों के माध्यम से अपना पक्ष मजबूत तरीके से रखा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।

कोर्ट का आदेश

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट एक पंजीकृत धार्मिक न्यास है और उसे किरायेदारी समाप्त करने का पूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने यह भी माना कि लंबे समय से किराया बकाया था और नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। हालांकि उपकिरायेदारी के आरोप को न्यायालय ने खारिज कर दिया। अंततः कोर्ट ने आदेश दिया कि शशि कुमार दुबे विवादित संपत्ति का कब्जा ट्रस्ट को सौंपें और 143 रुपये प्रतिमाह की दर से बकाया किराया चुकाएं। साथ ही वाद व्यय भी प्रतिवादी को वहन करना होगा।



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