ग्वालियर उपभोक्ता आयोग ने कार डीलर को जबरन एक्सेसरीज बेचने पर दोषी ठहराया। उपभोक्ता को 15,912 रुपये लौटाने और दो हजार रुपये प्रकरण व्यय देने का आदेश द …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 27 Mar 2026 01:32:39 PM (IST)Updated Date: Fri, 27 Mar 2026 01:32:39 PM (IST)

कार में जबरन एक्सेसरीज लगाकर वसूले पैसे, उपभोक्ता आयोग ने डीलर को दिया 15 हजार 912 रुपये लौटाने का आदेश
ग्वालियर जिला उपभोक्ता आयोग ने कार डीलर पर लगाया जुर्माना। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. डीलर ने जबरन एक्सेसरीज लगाकर उपभोक्ता से पैसे वसूले
  2. उपभोक्ता आयोग ने डीलर को दोषी ठहराते हुए आदेश दिया
  3. उपभोक्ता को कुल 15,912 रुपये वापस करने के निर्देश दिए

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर जिला उपभोक्ता आयोग ने कार खरीद में जबरन एक्सेसरीज जोड़कर पैसे वसूलने के मामले में डीलर को दोषी ठहराया है। आयोग ने कार डीलर को उपभोक्ता संगीता गुप्ता को कुल 15 हजार 912 रुपये लौटाने और साथ ही दो हजार रुपए प्रकरण व्यय देने का आदेश दिया है।

मामले के अनुसार, उपभोक्ता ने 21 सितंबर 2022 को कार खरीदने के लिए डीलर से संपर्क किया था और साफ तौर पर कहा था कि वह गाड़ी में किसी भी प्रकार की एक्सेसरीज नहीं लगवाना चाहता। इसके बावजूद 28 सितंबर 2022 को जब कार की डिलीवरी दी गई तो उसमें पहले से एक्सेसरीज लगी हुई थीं और उपभोक्ता से करीब 23 हजार रुपये की मांग की गई। विरोध करने पर डीलर के कर्मचारियों ने एक्सेसरीज को अनिवार्य बताते हुए दबाव बनाकर राशि वसूल ली।

उपभोक्ता ने आयोग में की शिकायत

  • उपभोक्ता ने एक अक्टूबर 2022 को अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजकर शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। कार डीलर ने अपने जवाब में कहा कि गाड़ी में एक्सेसरीज पहले से लगी थीं और उपभोक्ता ने पूरी जानकारी के साथ भुगतान कर वाहन लिया। यह भी कहा कि एक्सेसरीज खरीदना अनिवार्य नहीं होता, बल्कि ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है। डीलर ने यह भी दावा किया कि उसने प्रतिशत छूट देते हुए 5 हजार 912 रुपये वापस करने के लिए चेक तैयार रखा था।
  • मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने पाया कि डीलर यह साबित नहीं कर सका कि वाहन में एक्सेसरीज कंपनी द्वारा ही पहले से लगी थीं। यह भी माना गया कि उपभोक्ता पर एक्सेसरीज खरीदने का दबाव बनाया गया और राशि वसूली गई, जो अनुचित व्यापार व्यवहार है।
  • हालांकि आयोग ने यह भी माना कि परिवादी लंबे समय से एक्सेसरीज का उपयोग कर रहा है, इसलिए पूरी राशि लौटाना उचित नहीं है। इसी आधार पर आयोग ने डीलर को दस हजार रुपए क्षतिपूर्ति और पहले से देय 5 हजार 912 रुपये लौटाने का आदेश दिया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन निर्माता की इस मामले में कोई जिम्मेदारी सिद्ध नहीं हुई, इसलिए उसके खिलाफ परिवाद खारिज कर दिया गया।
  • डीलर एक्सेसरीज लेने का नहीं बना सकता दबाव

    कई बार कार डीलर ग्राहकों को यह कहकर गुमराह करते हैं कि कंपनी से ही एक्सेसरीज लगकर आती है या इसे लेना अनिवार्य है। यह फैसला साबित करता है कि एक्सेसरीज लेना पूरी तरह ग्राहक की स्वैच्छा पर निर्भर है। डीलर आपको कोई भी अतिरिक्त फिटिंग खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अगर, कोई शोरूम दबाव डाले, तो आप सीधे उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अवधेश तोमर, अधिवक्ता



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