मुख्यमंत्री मोहन यादव के फील्ड कार्यक्रमों, दिल्ली सहित मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में उनके दौरे, प्रशासनिक सख्ती, भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास समत्व में उनसे मिलने वालों की खबरें पहले के मुकाबले बेहतर तरीके से प्रस्तुत की जा रही हैं। जनता से जुड़ाव की जो खबरें आ रही हैं, वो मोहन यादव को धीरे-धीरे एक संवेदनशील मुख्यमंत्री बना रही हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता, उनके काम करने के तरीके और लोगों के बीच पहुंचकर जनता के आदमी बनने की कोशिश के प्रयास से उनकी नई इमेज बन रही है। इस मामले में जनसंपर्क आयुक्त मनीष सिंह की भूमिका भी अहम है।

सीएम यादव और सिंधिया का डिनर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में भोपाल के सीएम हाउस में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को डिनर पर आमंत्रित किया। दोनों नेताओं के बीच क्या चर्चा हुई इसका खुलासा तो दोनों ने नहीं किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दोनों के बीच अब बेहतर तालमेल दिखाई देगा। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात का असर निगम मंडलों में नियुक्ति पर दिखाई दे सकता है। इतना ही नहीं, चर्चा के दौरान सिंधिया ने आईएएस अधिकारियों की प्रस्तावित तबादला लिस्ट में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अपनी पसंद के नाम भी बताए हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भी इन सब बातों से सहमत हुए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जब निगम मंडल की सूची जारी होगी तो उसमें सिंधिया के कितने समर्थक दिखाई देंगे?

कहां गए भोपाल, इंदौर और जबलपुर के मास्टर प्लान?

मध्य प्रदेश में मोहन सरकार को काम करते हुए अब सवा दो साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक भोपाल, इंदौर और जबलपुर के मास्टर प्लान को लागू नहीं किया जा सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज शहरीकरण के दौर में मास्टर प्लान में देरी से शहरों के नियोजित विकास और निवेश की गति प्रभावित हो रही है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के इन तीनों बड़े शहरों का मास्टर प्लान वर्षों से नहीं बन पाने का मुद्दा कभी भी गर्मा सकता है। बताया गया है कि विभाग में मास्टर प्लान तो तैयार करके रखे हैं, लेकिन उस पर राजनीतिक स्तर पर चर्चा नहीं हो पा रही है।

बड़ी सर्जरी के पहले सीएम की छोटी सर्जरी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछले रविवार सीधी का अचानक दौरा कर वहां के कलेक्टर को हटाने के आदेश दिए। इसी के साथ गुना के एसपी अंकित सोनी को भी हटा दिया। सीधी कलेक्टर जनता की शिकायत के चलते हटाए गए तो गुना के एसपी पर हाल ही में हुआ रिश्वत कांड भारी पड़ गया। मुख्यमंत्री का मानना है कि कलेक्टर की मैदानी स्तर पर शिकायत मिलने पर उन्हें फील्ड के बजाय वल्लभ भवन में बैठाना ज्यादा बेहतर है। पता चला है कि प्रस्तावित बड़े प्रशासनिक फेरबदल में सीधी के कलेक्टर और गुना के एसपी का नाम तो शामिल था, लेकिन उसके पहले ही मुख्यमंत्री ने इन दोनों को हटाकर संदेश दिया है कि प्रदेश में कलेक्टर और एसपी को आम जनता की आवाज को तवज्जो देना होगा, नहीं तो उनकी कुर्सी सुरक्षित नहीं है। यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री आगे भी इसी तरह के औचक निरीक्षण करते रहेंगे। देखना है कि अब अगला नंबर किस कलेक्टर का आता है।

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