नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। जिला न्यायालय ग्वालियर में बुधवार को एक मामला बेहद चर्चा में रहा, जहां सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम नंबर 108 अधिवक्ताओं से खचाखच भर गया। वहीं कई वकील बाहर खड़े होकर इस मामले को सुनते रहे। मामला था आरोन के बन्हेरी गांव में अपराध के फर्जीवाड़ा का।
इस मामले की सुनवाई के दौरान षष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश विवेक कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव को समन जारी कर सुबह 10 बजे कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। हालांकि एसपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, लेकिन निरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मी जरूर पहुंचे।
…तो आपमें इतनी ताकत कहां से आई
जैसे ही पुलिसकर्मी कोर्ट पहुंचे, न्यायाधीश ने सख्त लहजे में सवाल किया, आपने बिना पूरी जांच किए और मजिस्ट्रेट की अनुमति लिए बिना फरियादियों पर एफआइआर कैसे दर्ज कर दी? ईडी और सीबीआई भी बिना जांच और अनुमति के एफआइआर दर्ज नहीं कर सकतीं तो आपमें इतनी ताकत कहां से आई।
गुरुवार सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश हों एसपी
न्यायधीश ने यह भी पूछा कि क्या इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से कोई लिखित अनुमति ली गई थी, लेकिन पुलिसकर्मी इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। जब कोर्ट ने निरीक्षक से एसपी की अनुपस्थिति का कारण पूछा तो बताया गया कि वे किसी काम से बाहर हैं।
इस पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि यदि वे शाम चार बजे तक आ सकते हैं तो उपस्थित हों, अन्यथा लिखित सूचना दें और गुरुवार सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश हों।
कानून की किताब रखकर पूछे तीन सवाल, जवाब नहीं दे पाए
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1-क्या मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी फरियादी को जेल भेजा जा सकता है? अगर ऐसा कोई कानून है तो बताइए। -
2-यदि मामला झूठा पाया गया, तो उसके खिलाफ क्या अलग से कोई कार्रवाई की गई? -
3-एफआइआर दर्ज करने से पहले क्या आपने एसपी से लिखित में अनुमति ली थी क्या?
कोर्ट में हाजिर नहीं हुए एसपी
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ऐसे सभी मामलों की होगी जांच
बुधवार को जिला न्यायालय में एक मामले में ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को हाजिर होना था, लेकिन किसी कारणवश वे नहीं आ पाए। अब उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे फिर से न्यायालय में बुलाया गया है।
-घनश्याम मंगल अपर लोक अभियोजक।
