इंदौर की कान्ह नदी पर पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि बीते 25 वर्षों में अलग-अलग प्रोजेक्टों के माध्यम से खर्च की गई है, लेकिन अभी तक कान्ह नदी शुद्ध नहीं हो पाई है। इंदौर की प्रतिनिधि संस्था अभ्यास मंडल ने इस नदी को शुद्ध बनाने के लिए लंबे समय से अभियान चला रखा है। इसी कड़ी में रविवार को विश्व जल दिवस के मौके पर शहर के पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णपुरा छत्री के घाट पर एकत्र हुए और नदी के घाट की सफाई की।

 

घाट पर चारों तरफ कचरा और गंदगी पड़ी थी। अभ्यास मंडल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पहले घाट साफ किए, फिर पानी से उन्हें धोया। इसके बाद नदी में लोटे से शुद्ध जल प्रवाहित किया। इस मौके पर मंडल से जुड़े पदाधिकारियों ने कहा कि कान्ह नदी को साफ करना आवश्यक है, क्योंकि यह शिप्रा नदी में जाकर मिलती है। यदि कान्ह नदी दूषित होती है तो वह पवित्र शिप्रा नदी को दूषित करेगी। हर बारह वर्षों के बाद उज्जैन में सिंहस्थ मेला लगता है और करोड़ों भक्त सिंहस्थ में शामिल होकर स्नान करते हैं।

 

सकोरे भी वितरित किए कार्यक्रम के दौरान गर्मी में पक्षियों को पानी पिलाने के लिए सकोरे (मिट्टी के बर्तन) का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर श्याम सुंदर यादव ने जल संरक्षण और कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवित करने की शपथ दिलाई। इस मौके पर दिलीप वाघेला, बसंत सोनी, किशन सोमानी, निर्मल कुमरावत, इशाक चौधरी, संदीप खानवलकर, मनीष भालेराव, यश जायसवाल, सौरभ गौसर, मनीषा गौर, वैशाली खरे, रामेश्वर गुप्ता, मुरली खंडेलवाल आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम संचालन मालसिंह ठाकुर ने किया और आभार स्वप्निल व्यास ने माना।



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