भोपाल नगर निगम परिषद बैठक सोमवार 23मार्च होगी, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। इस बार बैठक सिर्फ बजट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कई विवादित मुद्दों के कारण सियासी टकराव के पूरे आसार हैं। विपक्ष ने पहले ही रणनीति बनाकर सत्तापक्ष को घेरने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक इस बार नगर निगम का बजट 3500 से 4000 करोड़ रुपए के बीच रह सकता है। पिछले साल 3611 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया था। इस बार भी बजट संतुलित रखने की चुनौती निगम प्रशासन के सामने है। इससे पहले रविवार को विपक्ष ने नेता प्रतिपक्ष सभ्यता जाति के आवास पर शहर सरकार को घेरने को रणनीति तैयार की।
प्रॉपर्टी टैक्स से राहत, लेकिन पानी-सीवेज महंगा
इस बार संपत्ति कर नहीं बढ़ाए जाने के संकेत हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिल सकती है।लेकिन दूसरी ओर जल कर और सीवेज कर में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है तो घरों के साथ-साथ अस्पताल, मैरिज गार्डन और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
गोमांस कांड पर फिर गरमाएगा सदन
स्लॉटर हाउस में 26 टन गोमांस मिलने का मामला एक बार फिर परिषद में गूंजेगा। पिछली बैठक में भी इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ था और इस बार भी विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर जवाब मांगेगा। वहीं हाल ही में हुई लोकायुक्त की कार्रवाई को लेकर भी विपक्ष हमलावर रहेगा। इस मुद्दे को भ्रष्टाचार और पारदर्शिता से जोड़ते हुए सत्तापक्ष से जवाब तलब किया जाएगा।
अधूरी बिल्डिंग और मौत का मामला
लिंक रोड नंबर-2 पर 40 करोड़ रुपए की लागत से बनी नई निगम बिल्डिंग भी विवादों में है।अधूरी तैयारियों के बीच शुरुआत और एक बुजुर्ग की मौत के मामले को विपक्ष गंभीर लापरवाही बताते हुए उठाएगा। भोपाल मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग की कमी लंबे समय से समस्या बनी हुई है। इसी को लेकर 14 नई पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव परिषद में आएगा, जिनमें से 5 मेट्रो स्टेशनों के नीचे बनाई जाएंगी। शहर के लिए बड़ी समस्या बने आदमपुर खंती के पुराने कचरे के निपटान का प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा। करीब 55 करोड़ रुपए की लागत से इस कचरे को खत्म करने की योजना है।
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145 पुराने वाहन होंगे कंडम
नगर निगम के 145 पुराने और अनुपयोगी वाहनों को कंडम घोषित करने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। इससे निगम के खर्च में कमी लाने की कोशिश की जाएगी।इन सभी मुद्दों को देखते हुए परिषद की बैठक के हंगामेदार रहने के पूरे संकेत हैं। विपक्ष जहां लगातार हमलावर रहेगा, वहीं सत्तापक्ष को बजट के साथ-साथ कई सवालों के जवाब भी देने होंगे।
