इंदौर में ब्रजेश्वरी अग्निकांड को लेकर अभी तक सरकार या अन्य विभाग ने कोई रिपोर्ट पेश नहीं की है, लेकिन जांच के दौरान जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उसमें कार के कारण ही आग लगने की वजह मानी जा रही है। विभागों की जांच में तकनीकी तथ्यों के अलावा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी शामिल हैं। मनोज पुगलिया के जिस बंगले में आग लगी थी, उसमें सोलर सिस्टम लगा हुआ था। इस कारण उनके घर में विशेष प्रकार का मीटर लगा हुआ था, जिसमें पल-पल का डेटा सुरक्षित रहता है। बिजली कंपनी ने उस डेटा का विश्लेषण कर पता लगाया कि जिस समय हादसा हुआ, तब घर का कुल लोड 9 किलोवाट तक पहुंचा था।

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रात तीन बजे के बाद चार्जिंग होने पर ऑटो कट-ऑफ हुआ था। फिर साढ़े तीन बजे सप्लाई शुरू हुई और फिर शॉर्ट सर्किट के बाद आग कार की बैटरी तक पहुंची। बैटरी के विस्फोट के बाद आग अचानक भड़की और पोल के समीप लगे वायर जलने लगे। इसके बाद आग आंगन में खड़ी बाइकों तक पहुंची और फिर घर के अगले हिस्से को चपेट में ले लिया। इस घटना के बाद कार की कंपनी ने भी विशेषज्ञ पहुंचाए और घटनास्थल पर कार के जले हुए कलपुर्जे देखे।

आग पहले कार के पिछले हिस्से में लगी थी, उसी हिस्से में बैटरियां लगी होती हैं। कार के पिछले टायर पहले जले थे, जबकि अगले हिस्से के अलॉय व्हील ज्यादा नहीं जले थेआपको बता दें कि उद्योगपति के बेटे सौरभ पुगलिया ने कहा था कि कार की बैटरी रात को चार्जिंग पर नहीं लगी थी और आग पोल के कारण घर में लगी थी। इसके बाद बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी विशेषज्ञों ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू की थी।



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