ग्वालियर विकास प्राधिकरण की करोड़ों रुपये की जमीन का बंदरबांट कर शासन को ही चूना लगाने वाले बिल्डरों पर एफआइआर दर्ज की गई है। …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 20 Mar 2026 08:31:28 PM (IST)Updated Date: Fri, 20 Mar 2026 08:31:28 PM (IST)

ग्वालियर में भू-माफिया पर बड़ी कार्रवाई, डाकघर की जमीन बेची, GDA के 25% हिस्से के प्लॉट भी हड़प लिए
ग्वालियर में भू-माफिया पर बड़ी कार्रवाई। (एआई से जेनरेट किया गया इमेज)

HighLights

  1. ग्वालियर में भू-माफिया पर बड़ी कार्रवाई।
  2. डाकघर की जमीन बेची।
  3. GDA के 25% हिस्से के प्लॉट भी हड़प लिए।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर विकास प्राधिकरण की करोड़ों रुपये की जमीन का बंदरबांट कर शासन को ही चूना लगाने वाले बिल्डरों पर एफआइआर दर्ज की गई है। ईवा गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र भारद्वाज और संयोजक पुनीत शर्मा पर महाराजपुरा व गणेश गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष संतोष शर्मा पर बहोड़ापुर थाने में एफआइआर दर्ज की गई है।

सालों से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था, लेकिन ग्वालियर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार आंख बंदकर बैठे रहे। हाल ही में जब भोपाल से सख्ती हुई तो आनन-फानन में अधिकारी पुलिस के पास एफआइआर के लिए पहुंचे। अभी पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा में एफआइआर की है, लेकिन इसमें कूटरचित दस्तावेज तैयार करने सहित अन्य धाराओं में भी एफआइआर की जाएगी।

डाकघर की जमीन हड़पी, दो करोड़ की धोखाधड़ी

बहोड़ापुर में गणेश गृह निर्माण समिति द्वारा जीडीए से कालोनी विकसित कर प्लाट बेचने का अनुबंध किया गया था। जो जमीन गृह निर्माण समिति को आवंटित की गई, उसमें से 20 हजार वर्गफीट जमीन पर डाकघर बनना था। बिल्डर ने यह जमीन भी बेच दी और प्लाट काट दिए। इस जमीन की कीमत करीब दो करोड़ रुपये है।

जब जीडीए के अधिकारियों को पता लगा तो इस जमीन के प्लाट की राशि गाइडलाइन के हिसाब से भुगतान करने के लिए पत्राचार किया गया, लेकिन संस्था के अध्यक्ष संतोष शर्मा ने पत्रों का कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद इस मामले में बहोड़ापुर थाने में शिकायती आवेदन दिया गया और अब एफआइआर दर्ज की गई है।

जीडीए के 25 प्रतिशत भू-खंड हड़प गया भू-माफिया

ईवा गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र भारद्वाज निवासी गांधी नगर और संयोजक पुनीत शर्मा द्वारा जीडीए की जमीन कालोनी विकसित करने के लिए ली गई थी। महाराजपुरा के मऊ और आसपास के क्षेत्रों में जमीन ली गई।

इस जमीन पर कालोनी विकसित कर 25 प्रतिशत भू-खंड जीडीए को सुपुर्द किए जाने थे, लेकिन धर्मेंद्र भारद्वाज और पुनीत शर्मा ने ये प्लाट जीडीए को नहीं दिए। इनकी रजिस्ट्री खुद ही कर दी और जीडीए की जमीन हड़प गए। फिर जीडीए द्वारा जब रुपये जमा करने के लिए पत्राचार किया गया तो वह भी जमा नहीं किए गए। इस मामले में महाराजपुरा थाने में एफआइआर दर्ज की गई है।

एफआईआर होते ही शुरू हुआ सिफारिशों का दौर

जैसे ही इन दोनों मामलों में एफआइआर दर्ज हुई, तो दोनों ही मामलों में भू-माफिया की सिफारिश के लिए माननीयों के यहां से फोन आने लगे। संबंधित थानों में दिनभर सिफारिशी फोन पहुंचते रहे।



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