भोपाल में कल से चैत्र नवरात्र की शुरुआत के साथ ही भक्ति और आस्था का माहौल बनने जा रहा है। शहर के छोटे-बड़े सभी दुर्गा मंदिरों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कहीं फूलों से भव्य सजावट की जा रही है तो कहीं रंग-बिरंगी लाइटिंग से मंदिरों को सजाया जा रहा है। इस बार नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेंगे। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाएगी। खास बात यह है कि नवरात्र के साथ ही हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत मानी जाती है, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाता है।
भोपाल में 25 से ज्यादा स्थानों पर विराजेंगी मां
इस बार भोपाल में 25 से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा और मां काली की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। पुरानी सब्जी मंडी, लालघाटी, इतवारा, करोंद, अशोका गार्डन, सईद नगर, ईदगाह हिल्स, संजीव नगर, बरखेड़ा पठानी और हमीदिया अस्पताल क्षेत्र सहित शहर के कई इलाकों में माता के दरबार सजेंगे। पिछले साल करीब 20 स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित हुई थीं, जबकि इस बार संख्या बढ़ी है। बुधवार को मूर्ती लेने लोग पहुंचे।
मंदिरों में फूलों और लाइटिंग की तैयारी
शहर के प्रमुख मंदिरों में देवी दरबार को आकर्षक बनाने के लिए विशेष तैयारी की गई है। मां भवानी मंदिर में रोजाना अलग-अलग फूलों से माता का श्रृंगार किया जाएगा। इसके लिए गुलाब, गेंदा, सेवंती और सूरजमुखी जैसे फूलों की बड़ी मात्रा में व्यवस्था की गई है। वहीं काली मंदिर सहित अन्य मंदिरों में विशेष लाइटिंग और सजावट की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को भव्य दर्शन मिल सकें।
इन मंदिरों में भी खास आयोजन
शहर के कालका मंदिर चुनाभट्टी, शीतला माता मंदिर कोटरा सुल्तानाबाद, नारियलखेड़ा, मालवीय नगर और अशोका गार्डन के नवदुर्गा मंदिरों में भी विशेष पूजा-अनुष्ठान की तैयारी की गई है।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसके लिए सुबह 6:02 से 8:40 बजे और 9:16 से 10:56 बजे तक का समय शुभ माना गया है। इसके अलावा दोपहर में अभिजीत मुहूर्त (12:05 से 12:53 बजे) भी रहेगा।
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चुनरी यात्रा और ज्योति की तैयारी
नवरात्र को लेकर शहर में चुनरी यात्रा की बुकिंग शुरू हो गई है। साथ ही कई स्थानों पर मनोकामना ज्योति भी जलाई जाएगी। मंदिरों के बाहर सजावट के साथ भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
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ऐसे करें पूजा
भोपाल के पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन सुबह स्नान के बाद घर या मंदिर में साफ-सफाई कर कलश स्थापना करें। कलश को ईशान कोण में रखें और पूजा के समय मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
