मध्यप्रदेश में स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हजारों पद खाली होने के बावजूद हाल ही में जारी भर्ती में केवल 7 पदों पर वैकेंसी निकाले जाने से नर्सिंग अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। छात्र संगठन एनएसयूआई ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताते हुए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सरकारी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ की पहले से ही गंभीर कमी है।
नर्सों की कमी का आंकड़ा
जिला अस्पताल (DHs) – 1,513 पद खाली
सिविल अस्पताल (CHs) – 375 पद खाली
CHC, PHC और SHC – 1,283 पद खाली
मेडिकल कॉलेज – 2,416 पद खाली
आयुष विभाग – 135 पद खाली
प्रदेश में कुल- 5,722 नर्सों के पद खाली
कई अस्पतालों में मानकों से कम स्टाफ
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में IPHS मानकों के मुकाबले 18% से 75% तक कम पद स्वीकृत किए गए हैं। वहीं कई जगह स्वीकृत पद होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं की गईं। जिला अस्पतालों की Special Newborn Care Units (SNCU) में भी नर्स और शिशुओं का अनुपात मानकों से कम पाया गया। इसके अलावा कई जिला अस्पतालों के मातृत्व विभागों में 1% से 61% तक स्टाफ की कमी दर्ज की गई है।
आरक्षित वर्ग के लिए एक भी पद नहीं
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि इस भर्ती में सबसे चिंताजनक बात यह है कि OBC, SC और ST वर्ग के लिए एक भी पद निर्धारित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।
यह भी पढ़ें-MP में बदलेगा मौसम का मिजाज, गर्मी के बीच आंधी-बारिश की एंट्री, 4 दिन कई जिलों में रहेगा असर
सरकार से तीन प्रमुख मांगें
-प्रदेश में खाली पड़े स्टाफ नर्स पदों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक की जाए।
– संस्थानों में बड़े पैमाने पर नियमित भर्ती निकाली जाए।
– भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए।
यह भी पढ़ें-फर्जी बिल भुगतान मामले में निगम की कार्रवाई, आरोपी गुणवंत सेवतकर से वित्त विभाग का प्रभार वापस
भर्ती के बहिष्कार की अपील
भोपाल एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि केवल 7 पदों की भर्ती निकालना युवाओं के साथ मजाक है। संगठन ने प्रदेश के सभी पंजीकृत नर्सिंग अभ्यर्थियों से इस भर्ती प्रक्रिया का लोकतांत्रिक तरीके से बहिष्कार करने की अपील की है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में संशोधन नहीं किया तो इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
