ग्वालियर के जिला अस्पताल मुरार में आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) के तहत मुफ्त इलाज का दावा कमजोर साबित हो रहा है। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 15 Mar 2026 09:22:58 AM (IST)Updated Date: Sun, 15 Mar 2026 09:22:58 AM (IST)

ग्वालियर जिला अस्पताल में आयुष्मान कार्ड बना 'शोपीस', हजारों रुपये खर्च कर ऑपरेशन कराने को मजबूर मरीज
मुरार जिला अस्पताल में गर्मी में बंद पड़े AC दोगुना कर रहे मरीजों का दर्द।

HighLights

  1. वार्ड में सेंट्रल एसी बंद, गर्मी में मरीज परेशान
  2. टेंडर और एग्रीमेंट के बाद भी शुरू नहीं हुई सप्लाई
  3. मरीजों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) के तहत मुफ्त इलाज का दावा जिला अस्पताल मुरार में खोखला साबित हो रहा है। पिछले छह महीनों से अस्पताल प्रबंधन मरीजों को जरूरी इंप्लांट (हड्डी के आपरेशन में लगने वाला सामान) उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। आलम यह है कि गरीब मरीज आयुष्मान कार्ड हाथ में लिए अस्पताल तो पहुंच रहे हैं, लेकिन आपरेशन के लिए उन्हें बाजार से हजारों रुपये का सामान अपनी जेब से खरीदना पड़ रहा है।

अस्पताल में इंप्लांट की सप्लाई के लिए टेंडर की प्रक्रिया महीने पहले पूरी हो चुकी है, लेकिन संबंधित एजेंसियों ने अब तक सप्लाई शुरू नहीं की है। एग्रीमेंट होने के बावजूद एजेंसियां लापरवाही बरत रही हैं, जिसका सीधा खामियाजा उन जरूरतमंदों को भुगतना पड़ रहा है जिनके पास निजी अस्पतालों में जाने के पैसे नहीं हैं।

केस-वन: 10 हजार रुपये हो गए खर्चजिले के हस्तिनापुर निवासी देव प्रसाद को फ्रेक्चर होने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आयुष्मान योजना के तहत उनका आपरेशन प्रस्तावित था, लेकिन इंप्लांट उपलब्ध न होने के कारण आपरेशन के लिए इंप्लांट बाजार से खरीदना पड़ा। देव प्रसाद ने बताया कि इलाज में अब तक 10 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।

केस-टू: बाजार से मंगाया इंप्लांट डबरा निवासी ज्वाला प्रसाद का आपरेशन हो चुका है। उनके पास आयुष्मान कार्ड है, लेकिन उसका लाभ नहीं मिल सका। आपरेशन के दौरान इंप्लांट बाजार से खरीदकर लाना पड़ा। बुजुर्ग ज्वाला प्रसाद ने बताया कि आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी पूरा सामान बाजार से ही परिवार वाले लाए।

दोहरी मार: इलाज महंगा और ऊपर से गर्मी

मरीजों के लिए केवल आर्थिक बोझ ही परेशानी नहीं है, बल्कि वार्डों की स्थिति भी बदतर है। हड्डी रोग विभाग के वार्ड में लगा सेंट्रल बंद पड़ा है। फ्रैक्चर और आपरेशन के घावों के साथ मरीज पसीने से तर-बतर होकर गर्मी में वार्ड में पड़े रहने को मजबूर हैं। अस्पताल की इस अव्यवस्था पर प्रबंधन केवल जल्द सुधार के आश्वासन दे रहा है।

संबंधित एजेंसियों से एग्रीमेंट कर सप्लाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। एक-दो दिन में इंप्लांट की सप्लाई शुरू करने की बात कही गई है। सेंट्रल एसी को दुरुस्त कराने के लिए भी एजेंसी को निर्देशित किया जा चुका है।

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल मुरार



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