राजधानी भोपाल में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर अब होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की आपूर्ति के कारण जहां छोटे होटल, ढाबे और स्टॉल बंद होने लगे हैं, वहीं कई बड़े रेस्टोरेंट और होटल चेन ने अपने किचन का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। गैस संकट के बीच ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी सामने आने लगे हैं। कुछ रेस्टोरेंट संचालकों का दावा है कि सप्लायर घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर ऊंचे दामों पर देने के ऑफर कर रहे हैं।


इंडक्शन और इलेक्ट्रिक मशीनों पर बनने लगा खाना

गैस संकट के चलते शहर के कई बड़े रेस्टोरेंट और पर्यटन निगम से जुड़े होटल अब इंडक्शन स्टोव और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन निगम के भोपाल रीजनल मैनेजर एचएस दंडोतिया ने बताया कि गैस की कमी के कारण कई खाद्य पदार्थ अब इंडक्शन स्टोव पर तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि कुछ व्यंजन, खासकर चाइनीज फास्ट फूड, अभी भी खुली आंच पर ही बनते हैं, इसलिए उनके लिए गैस का इस्तेमाल जारी है। उन्होंने बताया कि फिलहाल रेस्टोरेंट के पास लगभग 2 से 3 दिन का एलपीजी स्टॉक बचा हुआ है। गैस की अनिश्चितता के कारण बड़े कार्यक्रमों की बुकिंग लेने में भी परेशानी आ रही है।


इलेक्ट्रिक डोसा मशीन से काम चला रहे रेस्टोरेंट

शहर के फास्टफूड संचालक सागर गैरे ने भी संकट से निपटने के लिए अपने आउटलेट्स पर इलेक्ट्रिक मशीनें लगाना शुरू कर दिया है। 2 दिन पहले ही डोसा बनाने की मशीन स्टॉल की गई है। रेस्टोरेंट के मैनेजर नरेंद्र धाकड़ के अनुसार फिलहाल लगभग 60 प्रतिशत खाना इंडक्शन स्टोव पर तैयार किया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में और मशीनें आने के बाद 10 से 20 प्रतिशत और काम इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे पूरी कमर्शियल कुकिंग को इलेक्ट्रिक सिस्टम पर लाने की तैयारी की जा रही है।


छोटे होटल और ठेले पर सबसे ज्यादा असर

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे होटल, ढाबों और स्ट्रीट फूड स्टॉल पर पड़ रहा है। भोपाल के 6 नंबर स्थित चौपाटी की कई दुकानें बंद हो गई है। छोटे कारोबारियों के पास वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ रही है या सीमित मेन्यू के साथ काम करना पड़ रहा है।

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प्रशासन का दावा,स्टॉक पर्याप्त

जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार फिलहाल प्रशासन के पास लगभग 3200 मीट्रिक टन एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि शहर में रोजाना करीब 10 से 15 हजार सिलेंडर की खपत होती है, इसलिए मौजूदा स्टॉक लगभग छह दिन के लिए पर्याप्त है। शहर में 45 एलपीजी गैस एजेंसियां संचालित हैं और जल्द ही नई सप्लाई आने की उम्मीद है। जादौन ने कहा कि एलपीजी की ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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गैस एजेंसियों के बाहर लग रही लंबी लाइन

शहर में अफवाहों और बढ़ती मांग के कारण गैस एजेंसियों के बाहर लगातार लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। घरेलू सिलेंडर लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। लगातार बढ़ती बुकिंग के कारण कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर की डिलीवरी में भी देरी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि शहर में गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है।



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