कूनो नेशनल पार्क प्राकृतिक माहौल में ढलकर चीते मुरैना से लेकर ग्वालियर तक पहुंचने के अलावा श्योपुर की राजस्थान से सटी सीमा पर बसे जिलों तक घूम रहे हैं …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 11 Mar 2026 07:39:54 AM (IST)Updated Date: Wed, 11 Mar 2026 07:46:07 AM (IST)

कूनो नेशनल पार्क में क्षमता से ज्यादा हुए चीते, अब नौरादेही अभयारण्य बनेगा तीसरा घर
कूनो में विचरण करते चीता शावक।

HighLights

  1. चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत में कूनो को 30 चीतों के लिए ही माना गया था अनुकूल, अब तक 50 पहुंची संख्या
  2. मुख्यमंत्री बोले- मई-जून में नौरादेही में छोड़े जाएंगे चीते, दूसरे घर गांधीसागर अभयारण्य में हैं तीन चीते
  3. कूनो में पिछले 30 दिन में ही कूनो में 13 शावकों के जन्म से यहां चीतों की संख्या अचानक बढ़ गई है

टीम नईदुनिया, भोपाल/ग्वालियर। देश में 17 सितंबर 2022 को शुरू किए चीता प्रोजेक्ट के अंतर्गत अब चीतों की संख्या न सिर्फ अफ्रीकी देशों से लाए गए कुल 20 चीतों से बढ़कर 53 हो गई है, बल्कि श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में यह आंकड़ा 50 पर पहुंच गया है। वहीं, मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर अभयारण्य में तीन चीतों को शिफ्ट किया जा चुका है।

चीतों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर ही पिछले दिनों मध्य प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा गया था कि सरकार का लक्ष्य साल के अंत तक चीतों की संख्या 50 पहुंचाने का है। इसके बाद अन्यत्र इनकी संख्या में वृद्धि की तैयारी की जाएगी, लेकिन बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों के अलावा पिछले 30 दिन में ही कूनो में 13 शावकों के जन्म से यहां चीतों की संख्या अचानक बढ़ गई है।

रानी दुर्गावती अभयारण्य तीसरा घर बनेगा

ऐसे में, कूनो और गांधी सागर के बाद देश में रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) चीतों का तीसरा घर बनेगा। इसका क्षेत्र 1,197 वर्ग किलोमीटर है। मंगलवार को यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने राज्य कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों को दी। उन्होंने बताया कि मई-जून में यहां चीते छोड़े जाएंगे।

चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही मध्य प्रदेश के तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जेएस चौहान ने बताया था कि 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला कूनो नेशनल पार्क 30 चीतों को बसाने के अनुकूल है।

यहां शिकार कर उनके भोजन के लिए पर्याप्त वन्य जीव मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रत्येक चीते को लगभग 50-100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की आवश्यकता होती है। यह आकलन चीतों के दौड़ने की क्षमता और उनकी प्रवृत्ति के अनुरूप किया गया है।

चीतों की संख्या को देखते हुए बढ़ा इलाका

प्रोजेक्ट शुरू होने के छह माह बाद ही चीतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न सिर्फ कूनो में श्योपुर व शिवपुरी वन मंडल का भाग भी जोड़ा गया बल्कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के भी कुछ जिलों को जोड़कर कॉरिडोर तैयार करने की कवायद भी की गई है। चीते भी यहां के प्राकृतिक माहौल में ढलकर मुरैना से लेकर ग्वालियर तक पहुंचने के अलावा श्योपुर की राजस्थान से सटी सीमा पर बसे जिलों तक घूम रहे हैं।

ऐसे फलफूल रहा है चीतों का कुनबा

  • कूनो में मौजूद सभी छह मादा चीता मां बन चुकी हैं। इनके द्वारा जन्मे कुल 33 शावकों में से कई वयस्क हो चुके हैं। केवल मंदसौर में बसी चीता धीरा ही मां नहीं बन सकी है।
  • सबसे पहले मां बनी ज्वाला चीता का तीन बार प्रसव हो चुका है। उसके द्वारा जन्मे कुल नौ शावक में से एक मुखी वयस्क होकर पांच शावकों को जन्म भी दे चुकी है। ऐसे में, इस परिवार के ही कुल 15 चीता हो चुके हैं।
  • इस वर्ष 30 दिनों के भीतर ही सात फरवरी को आशा ने पांच, 18 फरवरी को गामिनी ने तीन और नौ मार्च को ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है।

खुले जंगल में छोड़ा जाएगा

कूनो में चीतों की वंशवृद्धि तेजी से हो रही है। शावकों के अलावा बोत्सवाना से लाए गए चीते अभी बाड़े में ही हैं। इन्हें भी समय-समय पर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। चीतों को बाहर शिफ्ट करने को लेकर निर्णय चीता स्टीयरिंग कमेटी के द्वारा किया जाएगा। – उत्तम कुमार शर्मा, निदेशक, चीता प्रोजेक्ट



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