प्रदेशभर की आशा-उषा कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी भोपाल के शाहजहानी पार्क में धरना प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटीं महिला कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें उचित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।धरने के दौरान संगठन की अध्यक्ष नर्मदा ठाकरे ने कहा कि आशा-उषा कार्यकर्ता गांव-गांव और शहर के वार्डों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, सर्वे और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को जमीन पर लागू करने का काम करती हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से उन्हें पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं दी जा रही।

मानदेय और प्रोत्साहन राशि के लिए संघर्ष

उन्होंने कहा कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी हैं, लेकिन हमें आज भी मानदेय और प्रोत्साहन राशि के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई में इतने कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कई बार सरकार और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। “अगर जल्द ही हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा,” उन्होंने चेतावनी दी।

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प्रमुख मांगें

आशा-उषा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाए और 1 अप्रैल 2026 से कम से कम 1000 रुपये प्रतिमाह वृद्धि की जाए।

आशा-उषा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए।

सभी कार्यकर्ताओं को फिक्स मानदेय 21,000 रुपये प्रतिमाह दिया जाए।

योजनाओं से जुड़ी प्रोत्साहन राशि और अन्य भुगतान समय पर सुनिश्चित किए जाएं।

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