मध्यप्रदेश के किसानों के मुद्दे को लेकर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने भोपाल स्थित सरकारी आवास पर रंगपंचमी के दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है, इसलिए इस मुद्दे को उठाने के लिए उन्होंने पत्रकारों को बुलाया है।दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश के 14 जिलों में उत्पादित बासमती चावल को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उगाए जाने वाले बासमती धान को एपीडा द्वारा जीआई टैग नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

14 जिलों के किसान वर्षों से कर रहे बासमती की खेती

उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल, मालवा और महाकौशल क्षेत्र के लगभग 14 जिलों-श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर- में हजारों किसान लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाला सुगंधित बासमती चावल उगा रहे हैं। इसके बावजूद जीआई टैग नहीं मिलने से किसानों को बाजार में उचित कीमत नहीं मिल रही।

2013 में मिला था जीआई टैग, 2016 में वापस लिया गया

दिग्विजय सिंह ने कहा कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिया था, लेकिन वर्ष 2016 में इसे वापस ले लिया गया। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग प्राप्त है, जबकि मध्यप्रदेश के किसानों को इससे वंचित रखा गया है।

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व्यापारिक लॉबी के दबाव का लगाया आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों के मिल मालिकों और व्यापारिक लॉबी के दबाव में मध्यप्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को कम कीमत पर खरीदकर दूसरे राज्यों के जीआई टैग के नाम पर विदेशों में निर्यात किया जा रहा है, जिससे व्यापारी और कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, जबकि किसान नुकसान उठा रहे हैं।

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फैसला नहीं हुआ तो करेंगे अनशन

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि केंद्र सरकार जल्द निर्णय लेकर मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग नहीं देती है तो वे किसानों के समर्थन में अनशन करेंगे और इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।

 



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