होस्टल में दूसरी युवतियों पर एप से लड़कों से दोस्ती कराने का दबाव डालने वाली छात्रा के मामले में जांच पूरी हो गई है और रिपोर्ट विवि को सौंप दी गई है। जांच कमेटी ने रिपोर्ट में छात्रा को हॉस्टल के नियमों का उल्लंघन करने का दोषी माना है और उसके निलंबन को सही ठहराया है। जबकि छात्रा का कहना है कि उसके निजी मामले को गलत तरीके से पेश किया गया है। अल्पसंख्यक छात्रा कोलकता की निवासी है और पांच साल का एक कोर्स करने इंदौर आई है। उसने लिखित स्पष्टीकरण भी कमेटी को दिया है।

मामला सामने आने के बाद छात्रा के पिता कोलकाता से इंदौर पहुंचे। हॉस्टल वार्डन ने उन्हें पूरे घटनाक्रम और जांच समिति की रिपोर्ट से अवगत कराया। छात्रा के पिता उसे अपने साथ कोलकाता ले गए। छात्रा ने हॉस्टल भी खाली कर दिया है।

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आरोप सही पाए गए

छात्रा खुद रोज वीडियो कॉल पर अपने बॉयफ्रेंड से बातें करती थी। इसके अलावा वह एक एप के जरिए दूसरी छात्राओं पर भी लड़कों से दोस्ती करने का दबाव डालती थी। उसकी शिकायत अन्य छात्राओं ने की थी। जांच के बाद आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सही पाए जाने पर बंगाल की अल्पसंख्यक छात्रा को हॉस्टल से निकाल दिया गया था। बाद में अलग से एक कमेटी गठित की गई थी।

शिकायतकर्ताओं के बयान भी रिपोर्ट में

हॉस्टल में रहने वाली चार अन्य छात्राओं ने भी शिकायतें की थीं। इन शिकायतों में यह भी कहा गया था कि वह छात्रा अन्य लड़कियों को एक मोबाइल एप के माध्यम से लड़कों से दोस्ती करने के लिए उकसा रही थी। विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति से मामले की जांच कराई। समिति ने शिकायतकर्ता छात्राओं के बयान दर्ज कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है।



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