धार्मिक नगरी उज्जैन में दुगने उत्साह से धुलेंडी का पर्व बुधवार को पूरे शहर में हर्षोल्लास मनाया गया। इस दौरान सड़कों पर बच्चे, महिला और पुरुषों की टोली जमकर गुलाल उड़ाकर एक दूसरे को होली पर्व की बधाई देते नजर आई। वहीं, सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भी चौक चौराहों पर अलर्ट रही।

मोक्षदायिनी शिप्रा के पावन तट पर स्थित ‘श्री सत पंच परमेश्वर पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़े’ में होली का पर्व एक अलौकिक उत्सव के रूप में मनाया गया। यहां का नजारा किसी मिनी सिंहस्थ जैसा प्रतीत हो रहा था, जहां साधु-संतों और उनके अनुयायियों ने भक्ति के रंगों में सराबोर होकर पर्व का आनंद लिया। उत्सव का आगाज़ अखाड़े के भीतर संतों द्वारा किए गए दिव्य कीर्तन और भजनों के साथ हुआ। इसके पश्चात, पारंपरिक मर्यादाओं का पालन करते हुए हर्बल गुलाल और ताजे पुष्पों से होली खेली गई। उत्सव में उज्जैन-आलोट क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की और संतों का आशीर्वाद लिया। साधु संतों के साथ रंग में रंगे सांसद अनिल फिरोजिया फिल्मी गानों पर थिरकते हुए नजर आए। 

इस अवसर पर अन्य प्रदेशों से आए साधु-संतों का जमावड़ा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। संतों ने एक-दूसरे को तिलक लगाकर और पारंपरिक ठंडाई पिलाकर पर्व की शुभकामनाएं साझा कीं। अखाड़े के संतों का कहना है कि शिप्रा की गोद में बना यह वातावरण साक्षात कुंभ की स्मृतियों को जीवंत कर रहा है। भक्तों के लिए भी संतों के सान्निध्य में होली खेलना एक अविस्मरणीय और सौभाग्यपूर्ण अनुभव रहा।

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अखाड़े में फूलों की होली

शिप्रा नदी किनारे पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़े में फूलो की होली मनाई गई। यहां साधु संतों ने पहले परंपरानुसार पूजा पाठ की। फिर स्थानीय संतों के साथ प्रयागराज और हरिद्वार से आए पंच परमेश्वर के साथ मिलकर होली का पर्व एक दूसरे को गुलाल लगाकर मनाया। पहले शिष्य साधुओं ने गुरु के पैर पड़कर फूलों की बारिश की। परंपरा निर्वहन करने के बाद आम श्रद्धालुओं ने भी साधु संतों के साथ होली खेली और डीजे पर डांस किया। इस मौके पर भांग मिश्रित बनाए व्यंजन का लोग लुफ्त उठाते नजर आए।



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