भगवान महाकाल की नगरी में इस वर्ष होली का पर्व अनोखे और भक्तिमय अंदाज में मनाया गया। शिप्रा नदी के तट स्थित नृसिंह घाट पर श्रद्धालु भजन-कीर्तन और नृत्य में लीन नजर आए। फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर, माता हरसिद्धि मंदिर और महाकाल वन में विशेष होली उत्सव आयोजित किया गया।

आयोजन के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीकात्मक रूप मंच पर प्रस्तुत किया गया। जैसे ही शिव-पार्वती ने नृत्य आरंभ किया, वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा। ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालु झूमते रहे।

भगवान महाकाल के साथ शिवगण, भूत-पिशाच और नंदी विशेष वेशभूषा में उपस्थित रहे। दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो शिव की सेना स्वयं धरती पर अवतरित हो गई हो। भक्तों की टोलियां जुलूस के रूप में आयोजन स्थल तक पहुंचीं और अबीर-गुलाल के साथ होली का आनंद लिया।

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महिला श्रद्धालुओं ने भी शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गाए और एक-दूसरे को रंग लगाया। यह आयोजन महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है, जिसमें मंदिर के पुजारी, भक्त और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

आयोजन के दौरान पारंपरिक चौसर खेलने और भांग तैयार करने की झलक भी देखने को मिली। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। महाकाल नगरी में रंग, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम देर तक बना रहा।



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