शहर के भागीरथपुरा के दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में पांच मार्च को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच आयोग भी प्रारंभिक रिपोर्ट रख सकता है। कोर्ट ने सेवानिवृत न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को जांच सौंपी है। आयोग ने 2 मार्च तक भागीरथपुरा कांड को लेकर साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा था। कुछ साक्ष्य आयोग के पास आए है। कुछ परिजनों ने मृतकों के अस्पताल की पर्ची, इलाज की जानकारी व अन्य सबूत आयोग के समक्ष पेश किए है।

 

इस कांड को लेकर अब तक नगर निगम से लेकर शासन तक जांच कमेटियां गठित की गई, लेकिन अभी तक मौतों की ठोस वजह पता नहीं चल पाई।  सुनवाईयों के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष कहा गया है कि डेथ ऑडिट में 16 मौतें दूषित पानी से होना पाई गई हैं, बाकी मौतों का ऑडिट नहीं हो पाया है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में अफसरों से पूछा था कि इसका आधार क्या है? क्या मृतकों के शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया है? विसरा रिपोर्ट कहां है? लेकिन उसका जवाब अफसर ठीक से नहीं दे पाए थे।

 

इस बार सुनवाई को सरकार की तरफ से भी रिपोर्ट पेश हो सकती है। आपको बता दे कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 36 मौतें हो चुकी है और साढ़े चार सौ से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया था। कई मृतकों को दूसरी बीमारियां भी थी, लेकिन परिजनों ने बताया कि डायरिया की कारण उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई थी।बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में नई लाइन बिछाई गई है और अब साफ पानी आ रहा है। बस्ती में नए मरीज भी मिलना बंद हो गए हैं।



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