मध्यप्रदेश में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। हर साल हजारों महिलाएं इसकी चपेट में आती हैं। इसी को देखते हुए प्रदेश में एचपीवी टीकाकरण अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी वायरस सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। किशोरावस्था में वैक्सीनेशन कराने से भविष्य में इस कैंसर का खतरा 80-85 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। भारत में हर साल करीब 1.25 लाख महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं और लगभग 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। सरकार का दावा है कि यह अभियान सिर्फ टीकाकरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक गंभीर बीमारी से बचाने की बड़ी पहल है। अब नजर इस बात पर है कि 90 दिनों में 8 लाख बेटियों तक यह सुरक्षा कवच कितनी तेजी से पहुंच पाता है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहल यादन वर्चुअली जुड़े। भोपाल के डॉ. कैलाशनाथ काटजू अस्पताल से राज्य स्तरीय शुरुआत की गई।

पहले दिन क्या रहा हाल

भोपाल में अभियान के पहले दिन 15 बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। सबसे पहला टीकाकरण 14 वर्षीय भाव्या का किया गया। अस्पताल परिसर में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक टीकाकरण सत्र चला। सभी बालिकाओं को टीका लगाने के बाद 30 मिनट निगरानी में रखा गया। एक किशोरी तान्या माथुर को टीका लगने के बाद हल्के चक्कर और खांसी की शिकायत हुई। डॉक्टरों ने तुरंत जांच की, ब्लड प्रेशर सामान्य पाया गया और ओआरएस देने के बाद 10 मिनट में स्थिति सामान्य हो गई। चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची सुबह से खाली पेट थी, वैक्सीन से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हुआ।

8 लाख बेटियों का लक्ष्य

प्रदेश में 90 दिनों के भीतर 8 लाख 14 वर्षीय बालिकाओं को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। पहले चरण में करीब 5.8 लाख डोज जिलों में भेजी जा चुकी हैं। अभियान स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में चलाया जाएगा।

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मामलों में आएगी गिरावट

स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि  आज का दिन स्वास्थ्य के लिए ऐतिहासिक है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाता है। लंबे समय से इसके समाधान को लेकर प्रयास चल रहे थे। एचपीवी वैक्सीनेशन से निश्चित रूप से मामलों में गिरावट आएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को 8 लाख वैक्सीन प्राप्त हो चुकी हैं और यह टीका पूरी तरह निःशुल्क दिया जा रहा है। साथ ही “निरोगी काया अभियान” के तहत जांच सुविधाएं बढ़ाई गई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जा रही है।

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कैसे लगेगा टीका

14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाएं पात्र हैं। अभियान शुरू होने के 90 दिन के भीतर 15 वर्ष की होने वाली बालिकाएं भी शामिल होंगी। टीकाकरण के लिए अभिभावक की सहमति जरूरी है। यू-विन पोर्टल पर पंजीकरण या सीधे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर टीका लगवाया जा सकता है।

 



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