प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को संपन्न हो गया। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस सत्र में 4.38 लाख करोड़ का बजट पारित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। बजट में गरीबों, महिलाओं, युवाओं, किसानों, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया।  समापन अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 16 वीं विधानसभा के इस नवें सत्र में कुल 10 बैठकें आयोजित हुईं, जिनमें विधायी और वित्तीय कार्यों के साथ जनहित से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। साथ ही सदन की कार्यवाही के दौरान इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पिलाने से हुई मौतों, सिंगरौली में आदिवासियों के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। अंतिम दिन कांग्रेस विधायक ने शीर्षासन कर अनोखे तरीके से विरोध जता कर सबका ध्यान खींचा। 

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अभिभाषण पर नौ घंटे, बजट पर दो घंटे चर्चा

राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव पर नौ घंटे से अधिक चर्चा हुई, जबकि बजट पर सामान्य चर्चा लगभग दो घंटे चली। भोजनावकाश स्थगित कर कई बार कार्यवाही का समय बढ़ाया गया। कुल मिलाकर सदन की कार्यवाही लगभग 62 घंटे तक चली। अध्यक्ष तोमर ने बताया कि सत्र के दौरान वर्ष 2026-27 आय-व्ययक, साथ ही वर्ष 2025-26 की तृतीय अनुपूरक मांगों को भी सदन की स्वीकृति मिली। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण बताते हुए कहा कि इससे सरकार की योजनाओं और नीतियों को संवैधानिक आधार प्राप्त हुआ है। इस दौरान कई जनहित से जुड़ी योजनाओं  की घोषणा और नई पहले की शुरुआत भी हुई। 

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सीएम केयर योजना शुरू होगी 

सीएम केयर योजना के तहत अब सरकारी अस्पतालों में बड़े इलाज उपलब्ध होंगे। इसमें हृदय बायपास, किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट जैसे इलाज शामिल हैं। इसके साथ ही टेलीमेडिसिन सुविधा को भी बढ़ाया जाएगा, जिससे गांव और शहर के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी। यह कदम जनता के लिए स्वास्थ्य सुविधा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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अवैध कॉलोनियों पर सख्ती

सत्र में भूमि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। अवैध कब्जों और कॉलोनियों की समस्याओं पर सरकार ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। कहा गया कि अगले तीन महीने में नए कानून लाकर अवैध कब्जों को रोका जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह पहल नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और जमीन के न्यायसंगत वितरण के लिए महत्वपूर्ण है।

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ई-बजट की पहल

इस बार बजट दस्तावेज ई-विधान परियोजना के तहत डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए गए। इसे तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना गया। सत्र में गौ-संरक्षण, आवारा श्वानों की समस्या, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पेयजल, कृषि, अधोसंरचना और नगरीय व्यवस्थाओं जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। सरकार ने इन विषयों पर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। गौ संरक्षण को पशुपालन मंत्री ने सदन में कहा कि सरकार दो साल में निराश्रित पशुओं को पूरी तरह सड़क से हटाने की बात कही है। 

जनभागीदारी से मोहल्लों का विकास 

प्रदेश में अब मोहल्लों और कॉलोनियों की सड़कों तथा नालियों का निर्माण जनसहभागिता मॉडल पर किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे कार्यों मेंआधी राशि राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि स्थानीय नागरिकों के सहयोग से जुटाई जाएगी। यह राशि एकत्र करने की जिम्मेदारी संबंधित नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद की होगी। इस पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग काम कर रहा है। 

ग्रीन भवन पर अतिरिक्त एफएआर 

शहरी विकास को पर्यावरण के साथ जोड़ने की दिशा में सरकार ने एक नया प्रावधान लागू किया है। मंत्री ने बताया कि नगर वन योजना के साथ अब “ग्रीन एफएआर” की व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसके तहत जो लोग अपने प्लॉट या भवन परिसर में अधिक से अधिक हरियाली विकसित करेंगे या पर्यावरण अनुकूल (ग्रीन) भवन बनाएंगे, उन्हें अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की अनुमति दी जाएगी

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प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई : विजयवर्गीय

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विस के बजट सत्र की समाप्ति पर कहा कि कार्यमंत्रणा समिति में जो कार्यसूची तय की गई थी, उसे पूरी तरह सदन में संपन्न किया गया। मंत्री ने बताया कि इस बार सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चली और विपक्ष का भी सकारात्मक सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि निर्धारित एजेंडे के लगभग 100 प्रतिशत विषयों पर चर्चा की गई, जो अपने आप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ सदस्यों ने होली पर्व के कारण समय को लेकर आशंका जताई थी, क्योंकि प्रदेश के कई क्षेत्रों में होली का उत्सव लंबे समय तक चलता है और उसके बाद सभी सदस्यों का तुरंत लौट पाना संभव नहीं होता। इसके बावजूद प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा कर कार्यवाही पूरी की गई। मंत्री के अनुसार, सत्र के दौरान 7 हजार से अधिक प्रश्न पूछे गए, जिनमें बड़ी संख्या में विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों ने जनता की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। अंत में उन्होंने बजट सत्र को बहुत ही फलदायी बताया और कहा कि सरकार ने सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत किया है।

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विपक्ष के सदस्यों ने चर्चा की मांग 

सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले विपक्ष ने अध्यक्ष से चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि विभागों की अनुदान मांगों पर अभी चर्चा बाकी है। सदस्य संबंधित विभागों की तैयारी करके आए है। उन्होंने सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाने और चर्चा कराने की मांग की। 

12 बैठकें प्रस्तावित थीं

बता दें, 16 फरवरी से शुरू हुए विधानसभा के बजट सत्र में 12 बैठकें प्रस्तावित थीं। इसमें 5 और 6 मार्च को भी बैठक होना थी, लेकिन 27 फरवरी को ही सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।



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