मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक का मुद्दा गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन में आरोपों की झड़ी लगाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। सिंघार ने दावा किया कि 8 गांवों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में है और कलेक्टर सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं। उनका आरोप है कि आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला, जबकि वितरण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने सदन में उदाहरण देते हुए कहा कि थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15 लाख से अधिक और यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के नाम पर करीब 14 लाख रुपये मुआवजा दिया गया। सवाल उठाया गया कि जब स्थानीय परिवारों को पूरा हक नहीं मिला तो बाहरी लोगों को भुगतान कैसे हुआ?

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JPC की मांग, काम रोकने की चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष ने पूरे प्रकरण की विधानसभा समिति (JPC) से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती और सभी प्रभावितों को पूरा मुआवजा नहीं मिलता, तब तक कोल ब्लॉक का काम तत्काल प्रभाव से रोका जाए। सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल जब क्षेत्र के दौरे पर गया तो उसे रोका गया और हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उनके मुताबिक इस कार्रवाई के वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं।

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सरकार के जवाब से असंतोष

मांग स्वीकार नहीं होने और सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सदन में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक का माहौल रहा।धिरौली कोल ब्लॉक को लेकर उठे सवालों ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार जांच की मांग पर क्या रुख अपनाती है और प्रभावित परिवारों को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

 



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