प्रदेश के स्कूल भवनों की मरम्मत और रखरखाव में कथित अनियमितताओं को लेकर विधानसभा में जोरदार बहस हुई। भाजपा विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने ध्यानाकर्षण के जरिए स्कूल शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मरम्मत मद की राशि का दुरुपयोग हो रहा है और इसमें स्कूल स्तर से लेकर वरिष्ठ कार्यालय तक के अधिकारी शामिल हैं।  मैहर जिले का उदाहरण देते हुए चतुर्वेदी ने बताया कि वहां 22 एफआईआर दर्ज हुई हैं, जिससे बड़े स्तर पर गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर बाहर से ठेकेदार बुलाकर काम कराया गया और एक ब्लॉक में करोड़ों रुपये की अनियमितता सामने आई है। उन्होंने दोषी अधिकारियों की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की।

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प्रति जिला 25 से 50 लाख तक प्रावधान

इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मरम्मत के लिए राशि प्राचार्यों की मांग के आधार पर जारी की जाती है। अप्रैल में विद्युत एवं भवन मरम्मत के लिए प्रति जिला 25 से 50 लाख रुपये तक का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि मैहर में शिकायत मिलने पर कलेक्टर से जांच कराई गई, जिसमें 17 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है और संबंधित ठेकेदारों पर भी कदम उठाए जा रहे हैं।

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अधिकारियों को हटाकर निष्पक्ष जांच कराएं

जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने तीन वर्षों का रिकॉर्ड मंगाने और वरिष्ठ अधिकारियों को हटाकर जांच कराने की मांग की। अध्यक्ष के निर्देश पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि जांच को प्रभावित करने वाले अधिकारियों को हटाकर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



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