राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में आयोजित ‘इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन एमपी’ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों को प्रदेश में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत के दिल से जुड़िए, मध्यप्रदेश के साथ आगे बढ़िए, क्योंकि राज्य आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में शामिल है और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में स्थित होने के कारण मध्य प्रदेश व्यापार, उद्योग और निर्यात के लिए रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। प्राकृतिक संसाधन, उद्योग-अनुकूल नीतियां, सशक्त बुनियादी ढांचा और पारदर्शी प्रशासन निवेशकों को भरोसेमंद माहौल देते हैं। उन्होंने राजस्थान और मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों की साझेदारी निवेश, नवाचार और विकास के नए आयाम स्थापित करेगी।
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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियां लागू की गई हैं। विस्तृत लैंड बैंक, पर्याप्त जल उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क निवेशकों के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है और ग्रीन एनर्जी उत्पादन में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। बड़े निवेश प्रस्तावों पर विशेष रियायतें देने की नीति के तहत सरकार उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है।
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मुख्यमंत्री ने टेक्सटाइल सेक्टर को विशेष संभावनाओं वाला क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रदेश में देश का पहला और सबसे बड़ा पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना पर दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते का उल्लेख करते हुए इसे क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में उद्योग संगठनों और निवेशकों ने मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीतियों की सराहना की तथा सीमावर्ती जिलों में टेक्सटाइल और तकनीकी उद्योगों के विस्तार पर जोर दिया। सेशन में विभिन्न औद्योगिक समूहों, चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश और राजस्थान की साझेदारी से औद्योगिक विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा।