नियमितीकरण समेत नौ सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को राजधानी भोपाल स्थित जयप्रकाश अस्पताल परिसर में संविदा और आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे कर्मचारियों ने नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।प्रदर्शन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब न्याय यात्रा में शामिल धार जिले की एक महिला कर्मचारी मीना परमार अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। वे अपने ढाई साल के बच्चे के साथ प्रदर्शन में शामिल होने आई थीं। साथी कर्मचारियों ने उन्हें तत्काल संभाला और परिसर में ही लिटाकर प्राथमिक देखभाल दी।
सीएम हाउस तक मार्च की कोशिश, पुलिस ने रोका
कर्मचारियों ने संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय से मुख्यमंत्री निवास तक न्याय यात्रा निकालने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने उन्हें अस्पताल परिसर से बाहर नहीं निकलने दिया। मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और बैरिकेडिंग कर दी गई। वाटर कैनन के साथ मौजूद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गेट पर ही रोक दिया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कर्मचारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि विधानसभा सत्र के चलते किसी भी रैली या मार्च की अनुमति नहीं है। इसके बाद कई कर्मचारी गेट के पास धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
कई संगठनों की भागीदारी
प्रदर्शन में एड्स कंट्रोल कर्मचारी संगठन, संयुक्त डेंगू-मलेरिया कर्मचारी संघ, समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ, संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ और नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी प्रदर्शन में मौजूद रहीं।
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2 फरवरी से जारी है आंदोलन
समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से संविदा कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। पिछले दो दिनों से कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे थे। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे, जिससे आंदोलन तेज करना पड़ा। उन्होंने कहा कि न्याय यात्रा के माध्यम से सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की गई है।
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नियमितीकरण और वेतन बढ़ोतरी प्रमुख मांग
कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सेवाएं दे चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। इसके अलावा न्यूनतम 21 हजार रुपये मासिक वेतन, अन्य राज्यों की तर्ज पर स्थायी नीति, 1 अप्रैल 2024 से लागू वेतन वृद्धि का एरियर, निजी एजेंसियों को हटाकर सीधे खाते में वेतन भुगतान, 50 प्रतिशत आरक्षण, स्वास्थ्य बीमा, ग्रेच्युटी और शासकीय अवकाश जैसी मांगें भी नौ सूत्रीय ज्ञापन में शामिल हैं। संघ का आरोप है कि वर्षों से दोहरी नीति के कारण कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जबकि वे प्रतिदिन 12 से 14 घंटे तक काम कर अस्पताल व्यवस्था को संभाले हुए हैं।
