होली पर्व को लेकर इस वर्ष तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। चंद्रग्रहण के कारण 3 और 4 मार्च को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं, लेकिन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने 2 और 3 मार्च को पारंपरिक रूप से होली मनाने का कार्यक्रम तय किया है।

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि बाबा महाकाल के दरबार में ग्रहण का विशेष प्रभाव नहीं होता। ग्रहण काल में भी दर्शन व्यवस्था निरंतर जारी रहती है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की शाम को होली सजाई जाएगी और सांध्य आरती में बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद शाम 7 बजे विधिवत होलिका दहन किया जाएगा।

3 मार्च की सुबह होने वाली भस्म आरती में भी प्रतिदिन की तरह पूजन-अर्चन होगा, लेकिन विशेष रूप से बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर होली का पर्व मनाया जाएगा। पंडित शर्मा ने स्पष्ट किया कि ग्रहण काल के दौरान केवल गर्भगृह में पूजन-अर्चन निषिद्ध रहेगा, जबकि श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। ग्रहण अवधि समाप्त होने के बाद नियमित पूजा क्रम फिर से प्रारंभ हो जाएगा।

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हर्बल गुलाल और शक्कर की माला चढ़ेगी


विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष भी परंपरानुसार 2 मार्च को संध्या आरती के बाद होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, संध्या आरती में बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और शक्कर की माला चढ़ाई जाएगी। इसके बाद ओंकारेश्वर मंदिर के सामने विधिवत पूजन-अर्चन के साथ होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित व्यवस्था का पालन करते हुए दर्शन करें और पर्व को श्रद्धा व अनुशासन के साथ मनाएं।



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