इंदौर के प्रमुख आंतरिक मार्ग एबी रोड पर प्रस्तावित 6.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शहर के वरिष्ठ आर्किटेक्ट अतुल शेठ ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से इस परियोजना की व्यवहारिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के बुनियादी ढांचे और संसाधनों की सुरक्षा के लिए इस खर्चीले कॉरिडोर के बजाय आवश्यकता आधारित चौराहों पर सुधार ही एकमात्र बेहतर विकल्प है।

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की थी घोषणा

इस परियोजना की नींव वर्ष 2018 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के साथ रखी गई थी। केंद्रीय सड़क निधि योजना के तहत इसके लिए 250 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। हालांकि यह मार्ग अब राष्ट्रीय राजमार्ग न होकर शहर का आंतरिक हिस्सा बन चुका है क्योंकि वर्ष 2000 से पहले ही शहर के लिए अलग बायपास बनाया जा चुका है। सामान्यतः ऐसे कॉरिडोर का निर्माण राजमार्गों पर किया जाता है लेकिन इंदौर में इसे घनी आबादी वाले आंतरिक मार्ग पर थोपा जा रहा है।

इंजीनियरिंग कॉलेज की रिपोर्ट में कॉरिडोर की उपयोगिता 2 प्रतिशत से भी कम आई

प्रस्तावित कॉरिडोर के मार्ग में आठ प्रमुख चौराहे और पंद्रह से अधिक आंतरिक मार्ग शामिल हैं। आर्किटेक्ट शेठ के अनुसार कोई भी यातायात प्रवाह ऐसा नहीं है जो शुरुआती बिंदु से अंतिम बिंदु तक सीधा जाता हो। वर्ष 2024 के सर्वेक्षण और स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज की रिपोर्ट में इस कॉरिडोर की उपयोगिता 2 प्रतिशत से भी कम पाई गई थी। रैंप जोड़ने के बाद भी इसकी उपयोगिता मात्र 10 प्रतिशत तक ही सीमित रही जबकि इसकी तुलना में चौराहा सुधार योजना से 42 प्रतिशत से अधिक उपयोगिता प्राप्त की जा सकती है।

आर्थिक बोझ आएगा और नागरिक असुविधा झेलेंगे

अतुल शेठ के अनुसार परियोजना की लागत जो 2020 में 250 करोड़ रुपये अनुमानित थी वह अब बढ़कर 600 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है। इसमें भूमिगत पाइपलाइनों और सीवरेज सिस्टम के स्थानांतरण का कोई स्पष्ट बजट या तकनीकी रिपोर्ट शामिल नहीं है। इसके निर्माण में लगने वाले 5 से 7 वर्षों के दौरान शहर के मुख्य मार्ग पर भारी यातायात जाम और जनता को अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ेगा।

स्वतंत्र जांच की मांग

मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में चौराहा आधारित सुधार की घोषणा के बावजूद इस परियोजना को दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अतुल शेठ ने मांग की है कि एक स्वतंत्र तकनीकी समिति द्वारा इस पूरी योजना का समग्र परीक्षण किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि जनता के पैसे का सही उपयोग तभी संभव है जब परियोजना जमीनी हकीकत और यातायात की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो।

यह नुकसान झेलेगा शहर

शहर का आर्थिक नुकसान: 250 करोड़ की योजना अब 600 करोड़ के पार जा सकती है, जिससे सरकारी खजाने का भारी नुकसान होगा।

उपयोगिता का अभाव: कॉरिडोर की वास्तविक उपयोगिता मात्र 2% पाई गई है, जो शहर के यातायात ढांचे के लिए व्यर्थ है।

समय का नुकसान: निर्माण के कारण 5 से 7 वर्षों तक शहर के मुख्य मार्ग पर यातायात बाधित रहेगा।

बुनियादी ढांचे की क्षति: भूमिगत ड्रेनेज और जलापूर्ति लाइनों के स्थानांतरण से शहर की व्यवस्थाएं बिगड़ेंगी।

व्यावहारिकता की कमी: 8 चौराहों और 15 आंतरिक मार्गों को नजरअंदाज कर बनाया जा रहा कॉरिडोर जनता के लिए कष्टकारी होगा।

जरूरी आंकड़े

– 250 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि के साथ इस योजना की घोषणा केंद्रीय सड़क निधि के तहत की गई थी।

– 6.5 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर शहर के सबसे व्यस्त आंतरिक मार्ग पर प्रस्तावित है।

– 2 प्रतिशत से भी कम उपयोगिता विशेषज्ञों द्वारा किए गए प्राथमिक तकनीकी सर्वेक्षण में पाई गई है।

– 10 प्रतिशत तक ही उपयोगिता बढ़ पाई जब इसमें अतिरिक्त रैंप जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया।

– 42 प्रतिशत से अधिक यातायात सुधार केवल चरणबद्ध चौराहा सुधार कार्यों से संभव है।

– 600 करोड़ रुपये से अधिक वर्तमान में इस परियोजना की अनुमानित लागत पहुंच चुकी है।

– 7 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में चौराहा सुधार को प्राथमिकता देने की घोषणा की थी।

– 5 से 7 वर्षों तक निर्माण कार्य चलने के कारण नागरिकों को यातायात की गंभीर समस्या होगी।



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