जबलपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 45 पर ग्राम शहपुरा के निकट स्थित रेल ओवरब्रिज (आरओबी) के दोबारा क्षतिग्रस्त होने के मामले में शहपुरा थाना में गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। प्रकरण में निर्माण ठेकेदार और पर्यवेक्षण सलाहकार कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम, जबलपुर के संभागीय प्रबंधक राकेश मोरे द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार 22 फरवरी रविवार को शाम लगभग 4:40 बजे ओवरब्रिज की दूसरी लेन भी पूर्णतः ध्वस्त हो गई। इससे पहले 9 सितंबर 2025 को भोपाल दिशा की ओर स्थित रिटेनिंग वॉल गिर चुकी थी, जिसके बाद मरम्मत कार्य जारी था और आवागमन वन-वे कर दिया गया था। ताजा घटना के बाद जबलपुर-भोपाल मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
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निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि संबंधित ठेकेदार कंपनी मे. वागड़ इंफ्रा प्रा. लि. एवं मेसर्स सोरथिया वेल्जी रतना (जेवी), बांसवाड़ा (राजस्थान) द्वारा निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। साथ ही पर्यवेक्षण सलाहकार मेसर्स आई.सी.टी. प्रा. लि., नई दिल्ली के टीम लीडर पर भी निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप हैं। बता दें, कि यह निर्माण कार्य 19 दिसंबर 2017 के अनुबंध के तहत 7 फरवरी 2022 को पूर्ण हुआ था और अभी गुण-दोष दायित्व अवधि में था। 50 साल की अवधि के लिए बना यह 400 करोड़ रुपए का पुल चार साल ही में ढह गया। पहली घटना के बाद म.प्र. सड़क विकास निगम ने सीआरआरआई, नई दिल्ली से तकनीकी जांच कराई थी, जिसमें निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद 2 जनवरी 2026 को संबंधित ठेकेदार को डिबार भी कर दिया गया था। संभागीय प्रबंधक ने थाना शहपुरा में लिखित आवेदन देकर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विनोद जैन एवं टीम लीडर हुकुम सिंह परमार सहित अन्य जिम्मेदारों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।
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सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने की सिफारिश
जबलपुर–हिरण नदी मार्ग खंड पर स्थित इस रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के दो बार ध्वस्त होने के मामले में सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ने प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर तत्कालीन संभागीय प्रबंधक आरपी सिंह और सहायक महाप्रबंधक संतोष शर्मा के विरुद्ध म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियम-9 के तहत कार्यवाही की मांग की है। निगम का आरोप है कि निर्माण अवधि में गुणवत्ता और निगरानी मानकों का पालन नहीं किया गया। दोनों अधिकारी अब सेवा निवृत्त हो चुके हैं, ऐसे में पेंशन रोकने या वापस लेने की कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
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पुल की उम्र 50 वर्ष थी, चार साल में ढहा
यह सड़क परियोजना 7 फरवरी 2022 को पूर्ण हुई थी। इस पर 400 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। पुल की अनुमानित आयु 50 वर्ष थी, किंतु मात्र चार वर्ष में क्षतिग्रस्त होना गंभीर लापरवाही का संकेत माना जा रहा है।
