इंदौर के पंजीयन विभाग के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला ‘जनवरी से मार्च’ का त्रैमासिक काल इस बार फीका नजर आ रहा है। आमतौर पर इस समय रजिस्ट्रार कार्यालयों में स्लॉट कम पड़ जाते हैं और देर रात तक कामकाज चलता है, लेकिन इस साल स्थिति इसके उलट है। जनवरी के महीने में जमीनों और मकानों की रजिस्ट्री में 8.11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। विभाग के विश्लेषण के मुताबिक, 1 करोड़ रुपये से अधिक की प्रीमियम प्रॉपर्टीज में निवेशकों ने इस बार दूरी बनाई है। लक्ष्य की तुलना में राजस्व का बड़ा अंतर सामने आया है, जहां 2,613 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध विभाग मात्र 1,981 करोड़ रुपये ही जुटा पाया। 

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राजस्व में बड़ी कमी

जनवरी 2025 में विभाग को 525.26 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि जनवरी 2026 में यह आंकड़ा घटकर 471.24 करोड़ रुपये पर सिमट गया। यह सीधे तौर पर 54 करोड़ रुपये के नुकसान को दर्शाता है। यदि रजिस्ट्रियों की संख्या की बात करें तो पिछले साल इसी अवधि में 17,247 रजिस्ट्रियां दर्ज हुई थी, जो इस साल कम होकर 15,849 रह गई हैं। 

शहर के अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति भी अलग

इंदौर के चारों पंजीयन कार्यालयों के प्रदर्शन में काफी असमानता देखी गई है। जहां पुराने शहर और मध्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इंदौर-1 कार्यालय में 10.28 प्रतिशत की मंदी है, वहीं नए विकसित हो रहे क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले इंदौर-4 कार्यालय में 19.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान पुराने क्षेत्रों के बजाय नए विकासशील इलाकों की ओर केंद्रित हो रहा है।

बाजार में सुस्ती के पीछे सोने का हाथ

भले ही जनवरी के आंकड़े निराशाजनक रहे हों, लेकिन अप्रैल से जनवरी तक के पूरे वित्तीय वर्ष के आंकड़ों को देखें तो कुल रजिस्ट्रियों में पिछले साल के मुकाबले 1.21 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी है। जानकारों का मानना है कि मार्च में नई कलेक्टर गाइडलाइन आने की संभावना के चलते फरवरी और मार्च में काम में तेजी आ सकती है। वर्तमान सुस्ती के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। निवेश सलाहकार रूपा मालानी बताती हैं कि पहला, सोने की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने निवेशकों को रियल एस्टेट से हटाकर गोल्ड की तरफ आकर्षित किया है। दूसरा, बड़े निवेशक फिलहाल बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।

 



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