इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैली दूषित बीमारी का मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में गरमाया। प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विपक्ष के हंगामे के चलते चार बार विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से मौतों का भी मामला उठाया और मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की। इस पर जमकर हंगामा हुआ।

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स्पीकर तोमर ने दी व्यवस्था

विस स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने व्यवस्था देते हुए कहा कि नियमावली के अनुसार न्यायालय या किसी आयोग की जांच में शामिल विषय पर ऐसी कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए जिससे जांच प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि प्रश्नकर्ता की ओर से ऐसा कोई प्रश्न न पूछा जाए और सरकार की ओर से ऐसा कोई उत्तर न दिया जाए, जिससे न्यायालय में विचाराधीन विषय प्रभावित हो।

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चार मरीजों का इलाज जारी

प्रश्न के जवाब में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर 2025 के बीच डायरिया के मामलों में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। 29 दिसंबर को स्थिति की गंभीरता स्पष्ट हुई। सरकार ने सदन में जानकारी दी कि अब तक 22 मौतों की पुष्टि हुई है। कुल 459 मरीज अस्पताल में भर्ती किए गए, जिनमें से 4 मरीजों का उपचार जारी है। प्रयोगशाला जांच में हैजा और ई.कोलाई संक्रमण की पुष्टि हुई है। नमूनों की जांच एनआईआरबीआई-कोलकाता, एमजीएम माइक्रोबायोलॉजी लैब और डीपीएचएल-इंदौर में कराई गई।

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मुआवजे पर टकराव

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि पूरे इंदौर को पता है कि 35 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताते हुए 4 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। 

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राशि बढ़ाने पर विचार करेंगे : सीएम

इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और आवश्यकता पड़ने पर मुआवजे की राशि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए एक आईएएस अधिकारी को निलंबित किया गया है। इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि क्या सरकार केवल अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी, मंत्रियों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से 25 बच्चों की मौत हो गई। 

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नैतिक जिम्मेदारी पर घमासान

उमंग सिंघार ने इसे सिस्टम की विफलता बताते हुए संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक मौतों के बावजूद सरकार समय पर सक्रिय नहीं हुई। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष ने यूनियन कार्बाइड जैसी पूर्व की घटनाओं का हवाला देते हुए नैतिकता के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा।

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मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी

मुआवजे और इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया। उन्होंने मंत्रियों के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। स्पीकर ने प्रश्नकाल की मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन नारेबाजी जारी रहने पर 11:58 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। 12:07 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के सदस्य वेल में बैठकर नारेबाजी करते रहे। उमंग सिंघार ने कहा कि यह मृत्यु नहीं, हत्या है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम की वजह से हुई मौतें हैं और मंत्रियों को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। 12:10 बजे अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी। 2:01 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई। 

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कल चर्चा के आश्वासन पर हंगामा खत्म 

कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि यह महत्वपूर्ण विषय है और स्थगन पर चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस विधायक फिर गर्भगृह में पहुंच गए। 2:07 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए फिर स्थगित की गई। 2:38 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष मंत्रियों के इस्तीफे और स्थगन पर चर्चा की मांग को लेकर अड़ा रहा। 2:40 बजे सदन की कार्यवाही फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। 2:58 बजे कार्यवाही शुरू होने पर उमंग सिंघार ने अध्यक्ष से कहा कि स्थगन पर चर्चा का आश्वासन दिया गया था। अध्यक्ष ने कहा कि वह अपनी बात पर कायम हैं और शुक्रवार को चर्चा का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद सदन में हंगामा शांत हुआ।



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