मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय के परिसर में कुत्ते और वार्ड में चूहे अक्सर नजर आते हैं, लेकिन अब एक वार्ड में एक बिल्ली अपने बच्चों के साथ घूमती नजर आई। उनकी देखभाल कुछ कर्मचारी भी कर रहे हैं। एमवाय प्रबंधन ने बिल्ली के वार्ड में घूमने की घटना को गंभीर माना है और उन्हें पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
एमवाय अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा को लेकर अक्सर लापरवाही बरती जा रही है। हाल ही में अस्पताल के सामने सड़क पर दो महिलाएं एक मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाती नजर आईं, तो अब ओपीडी विभाग में बिल्ली नजर आई है। छह माह पहले इसी अस्पताल में चूहों ने दो नवजात बच्चियों के अंग कुतरे थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। यह मामला काफी गरमाया था और विभाग के छह कर्मचारियों को हटा दिया गया था। इस बार अस्पताल में बिल्लियों की मौजूदगी ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एमवाय अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग में एक बिल्ली अक्सर तीन बच्चों के साथ नजर आती है। कुछ मरीजों ने बिल्ली का वीडियो भी बनाया है। बताया जा रहा है कि दस दिन पहले बिल्ली ने अस्पताल में ही बच्चों को जन्म दिया है और वे इधर-उधर घूमते रहते हैं। मरीजों ने एचआईवी संक्रमित मरीजों के वार्ड और दवा कक्ष में भी कई बार बिल्ली को देखा है। इस मामले में एमवाय अस्पताल के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कहा कि हाउसकीपिंग कंपनी को बिल्लियों को पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए पिंजरे लगाए जाएंगे और अब तक बिल्ली के दो बच्चों को पकड़ लिया गया है।
इंदौर के एमवाय अस्पताल में पूर्व में हुई चूहाकांड की घटना ने काफी तूल पकड़ा था, जिससे राजनीति भी गरमा गई थी। जयस ने तीन दिनों तक अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया था और प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अस्पताल का दौरा किया था।
