मध्यप्रदेश बजट 2026-27 को लेकर प्रदेश के विभिन्न वर्गों में उत्साह और उम्मीदें दोनों हैं। सरकार 18 फरवरी को अपना पहला डिजिटल और ‘थ्री-ईयर रोलिंग बजट’ पेश करने जा रही है। विशेषज्ञों और उद्योग जगत ने अपनी प्रतिक्रियाओं के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई हैं।
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युवा और पर्यटन पर केंद्रित विकास योजनाएं बनें
उद्योग सलाहकार प्रकल्प जैन के अनुसार, आगामी बजट में युवा कौशल विकास को शीर्ष प्राथमिकता मिलनी चाहिए ताकि उन्हें उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुसार आत्मनिर्भर बनाया जा सके। स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए मेंटरशिप, तकनीकी सहायता और वित्तीय सरलता आवश्यक है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक उपकरणों की मांग की गई है। इसके अलावा, उज्जैन, मांडव और ओरछा जैसे ऐतिहासिक स्थलों के लिए विशेष पर्यटन पैकेज की आवश्यकता है ताकि मध्यप्रदेश अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभरे। औद्योगिक क्लस्टर निर्माण से क्षेत्रीय संतुलन और रोजगार सृजन की राह आसान होगी।
महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन दें
AIMP वुमन विंग सिद्धि की अध्यक्ष श्रेष्ठा गोयल ने महिला उद्यमियों के लिए बिना गारंटी के ऋण और ब्याज दरों में रियायत की उम्मीद जताई है। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित कामकाजी महिला हॉस्टल और औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आरक्षित भूमि की आवश्यकता पर बल दिया है। मार्केटिंग के मोर्चे पर, ‘शी-मार्ट’ जैसे आउटलेट्स का विस्तार और डिजिटल ट्रेनिंग के जरिए ई-कॉमर्स सपोर्ट की मांग प्रमुख है। इसके साथ ही, महिला MSMEs के लिए कर छूट, बिजली शुल्क में रियायत और सरकारी स्तर पर मेंटरशिप नेटवर्क स्थापित करने का सुझाव दिया है ताकि महिलाएं नवाचार और एआई जैसी तकनीकों से जुड़ सकें।
कर सुधार और पारदर्शी कानून प्रक्रिया की दिशा में बढ़ें
म.प्र. टैक्स कंसलटेंट एसोसिएशन के चेयरमेन एसएन गोयल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए। उन्होंने जीएसटी कानून में सुधार के लिए कमेटी बनाने और इंदौर जैसी व्यावसायिक राजधानी में जीएसटी ट्रिब्यूनल स्थापित करने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि किसी एक विक्रेता की गलती की सजा सही खरीदार को नहीं मिलनी चाहिए। इसके अलावा, स्क्रैप बिजनेस पर कर की दर 5% तक सीमित करने और पब्लिक ट्रस्ट कार्यालयों के आधुनिकीकरण की बात कही है। ट्रस्ट पंजीकरण शुल्क को युक्तिसंगत बनाना भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
वित्तीय अनुशासन और पलायन नियंत्रण पर ध्यान दे सरकार
आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. विश्वकर्मा ने सरकार को फिजूलखर्ची रोकने और वित्तीय घाटे को कम करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बजट शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे (IT, रियल एस्टेट, कृषि) पर आधारित होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को सुदृढ़ करना अनिवार्य है ताकि शहरों की ओर हो रहे पलायन को रोका जा सके। उन्होंने सुझाव दिया है कि बजट में आय बढ़ाने के नए स्रोतों पर ध्यान दिया जाए और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने वाले क्षेत्रों को विशेष स्थान मिले, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बन सके।
