ग्वालियर अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने 70 प्लस आयु के आयुष्मान कार्ड का लक्ष्य शत प्रतिशत करने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और फील्ड कर्मियों …और पढ़ें

HighLights
- करीब एक लाख 39 हजार से अधिक बुजुर्गों को लाभांवित करने का लक्ष्य
- अब तक केवल करीब 45 हजार लाभार्थियों के ही आयुष्मान कार्ड बन पाए
- लगभग 67 प्रतिशत पात्र बुजुर्ग अब भी योजना की सुरक्षा से बाहर हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। केंद्र सरकार द्वारा 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाने की घोषणा ने लाखों परिवारों में उम्मीद जगाई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और दस्तावेजी खामियों के कारण बड़ी संख्या में पात्र बुजुर्ग अब भी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कार्ड बनने में देरी के चलते वे मुफ्त इलाज की सुविधा से वंचित हैं।
योजना के तहत करीब एक लाख 39 हजार से अधिक बुजुर्गों को लाभांवित करने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि अब तक केवल करीब 45 हजार लाभार्थियों के ही आयुष्मान कार्ड बन पाए हैं। इसका अर्थ है कि लगभग 67 प्रतिशत पात्र बुजुर्ग अब भी योजना की सुरक्षा से बाहर हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के दावों के बावजूद यह अंतर योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि बीते रोज अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने 70 प्लस आयु के आयुष्मान कार्ड का लक्ष्य शत प्रतिशत करने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और फील्ड कर्मियों के अनुसार कार्ड बनाने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी रुकावट आधार कार्ड का डेटा मिसमैच है। डॉ. प्रबल प्रताप सिंह का कहना है कि बुजुर्गों के कार्ड बनाने का अभियान लगातार चल रहा है और डेटा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय किया जा रहा है।
बुजुर्ग परेशान, इलाज में देरी
कार्ड न बनने का सीधा असर बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई बुजुर्गों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास सक्रिय आयुष्मान कार्ड नहीं है। स्वजन का कहना है कि तकनीकी खामियों का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि योजना का उद्देश्य उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है।
