MP News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दो आरोपितों के खिलाफ लूट में दर्ज आपराधिक मामले को खत्म कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मिलिंद रम …और पढ़ें

HighLights
- कोर्ट ने सुधरने के वादे पर लूट के आरोपितों का राजीनामा किया स्वीकार
- यह भारतीय दंड संहिता में सुधार के कारण संभव हो सका है
- विवेचना के दौरान पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दो आरोपितों के खिलाफ लूट में दर्ज आपराधिक मामले को खत्म कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फडके ने दिया, जो भारतीय दंड संहिता में सुधार के कारण संभव हो सका है। दरअसल झपटमारी के मामले में पहले लूट और डकैती की धाराएं भी लगती थीं जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रविधान था।
इस कारण राजीनामा संभव नहीं हो पाता था, लेकिन नए बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) कानून में झपटमारी के लिए अलग धारा 304 (2) बनाई गई है, जिसमें तीन वर्ष के कारावास का प्रविधान है।
ऐसे मामलों का ट्रायल पहले विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में होता था, नए कानून में यह मजिस्ट्रेट कोर्ट में ही हो जाता है। मामले के अनुसार, मुरैना के कैलारस निवासी विक्की राठौड़ तथा राजकुमार राठौर ने हाई कोर्ट में अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से याचिका दायर की थी कि उनका कोई आपराधिक चरित्र नहीं है।
दोनों बेरोजगार हैं, हजीरा थाना में एक मामला दर्ज है। मामले में नौ जुलाई 2024 को रामनगर हजीरा निवासी रिंकी भदौरिया बैंक से 20 हजार रुपये निकाल कर पैदल घर जा रही थी। दो अज्ञात लड़के बाइक से आए और झपट्टा मारकर रुपयों वाला बैग छीनकर ले गए।
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पुलिस ने दोनों का गिरफ्तार कर जेल भेजा
विवेचना के दौरान पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। अधिवक्ता भदोरिया ने यह भी कहा कि फरियादिया और आरोपितों के बीच समाज के प्रबुद्ध लोगों ने राजीनामा करा दिया है, जिसके आधार पर उनके खिलाफ बीएनएसएस की धारा 528 में दर्ज एफआईआर रद कर देना चाहिए, ताकि याचिकाकर्ताओं को अच्छा नागरिक करने का मौका मिल सके।
हाईकोर्ट ने तर्कों से सहमत होते हुए एफआईआर रद कर दी। एडवोकेट भदौरिया के मुताबिक भारतीय न्याय संहिता में बदले कानून के बाद झपटमारी के मामले में राजीनामा के आधार पर हाईकोर्ट ने पहली एफआईआर रद की है।
